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इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने बीते 23 सितंबर को जारी अपने परामर्श पत्र में भारत के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन और कमीशन के ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया था.
इसका मकसद भारत में इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के ढांचे को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना, गलत बिक्री (Mis-selling) को रोकना और कमीशन की लागत को कम करके ग्राहकों के लिए प्रीमियम को सस्ता बनाना है.
अब 'इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (IBAI) ने इस पर आपत्ति जताई है.
नरेंद्र भरिंडवाल की अगुवाई वाली 'इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (IBAI) ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर प्रस्तावित प्रस्ताव में दखल देने की मांग की है.
उनका ऐसा कहना है कि IBAI इंश्योरेंस की गलत बिक्री (mis-selling) को रोकने के IRDAI के प्रयासों का समर्थन करती है, लेकिन उनका यह भी तर्क है कि कंसल्टेशन पेपर में प्रस्तावित कमीशन की सीमा और खर्च पर पाबंदियों से पॉलिसीधारकों, इंश्योरेंस ब्रोकर्स, नौकरियों, कॉम्पिटिशन और इंश्योरेंस सेक्टर में निवेश पर बुरा असर पड़ सकता है.
IBAI को IRDAI के किन प्रस्तावों पर है आपत्ति?
IRDAI ने अलग-अलग इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स और चैनल्स पर 30 से ज्यादा तरह के कमीशन कैप (अधिकतम सीमा) लगाने का प्रस्ताव दिया है, जो IBAI को पसंद नहीं आई क्योंकि अलग-अलग चैनलों से मिलने वाले कमीशन में काफी अंतर होता है.
ब्रोकर्स की संस्था ने अपने पत्र में तर्क दिया कि अगर खर्च में कटौती लागू की जाती है, तो इसका असर मुख्य रूप से ब्रोकर्स, इंश्योरेंस कर्मचारियों और इंश्योरेंस कंपनियों पर पड़ेगा, जबकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ग्राहकों को कम प्रीमियम या बेहतर फायदे मिलेंगे.
IRDAI के प्रस्ताव में बीमा कंपनियों के कुल खर्च की सीमा में करीब एक-तिहाई की कमी करने का प्रावधान है.
IRDAI के प्रस्ताव में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य इंश्योरेंस ब्रोकर शब्द को बदलकर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन इंटिटी करने की बात भी कही गई है.
IRDAI का प्रस्ताव ग्राहकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar