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100 साल पुरानी परंपरा निभाने कुल्लू थाना पहुंचे देवता अजयपाल, जानिए पुलिस स्टेशन जाने की क्या है मान्यता

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 25 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
100 साल पुरानी परंपरा निभाने कुल्लू थाना पहुंचे देवता अजयपाल, जानिए पुलिस स्टेशन जाने की क्या है मान्यता

कुल्लू: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान ढालपुर मैदान में सैकड़ों देवी-देवता अपने-अपने शिविरों में विराजमान हैं। उत्सव में देव मिलन और सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को देवता अजयपाल अपने हारियानों और देवलुओं के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर कुल्लू पुलिस थाना पहुंचे। यहां कुछ देर विश्राम करने के बाद देवता वापस अपने देवालय लौट गए। देवता के थाना पहुंचने के पीछे की मान्यता लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।

देवता अजयपाल के पुजारी नूप राम ने बताया कि देवता को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। मान्यता है कि देवता अजयपाल सूखे और अकाल से लोगों को राहत दिलाते हैं। इसी मान्यता और पुरानी परंपरा के अनुसार देवता हर वर्ष दशहरा उत्सव के दौरान कुल्लू थाना परिसर पहुंचते हैं। रविवार को भी देवता थाना परिसर में कुछ देर ठहरे और इसके बाद भगवान रघुनाथ के दर्शन के लिए रवाना हुए।

पुजारी नूप राम के अनुसार, इस परंपरा के पीछे करीब 100 साल पुरानी घटना जुड़ी हुई है। अंग्रेजों के शासनकाल में खांपू नाम का एक व्यक्ति देवता अजयपाल का कटियाला यानी भक्त था। वह ग्रामीण क्षेत्रों से अनाज एकत्रित कर देवता के भंडार की व्यवस्था करता था। बताया जाता है कि खांपू ने एक व्यक्ति की जमानत ली थी, लेकिन वह व्यक्ति पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस ने खांपू को गिरफ्तार कर लिया।

पुजारी के अनुसार, जब पुलिस खांपू को गिरफ्तार करके ले जा रही थी, तो उसके हाथ में बंधी हथकड़ी रास्ते में ही टूट गई। कुल्लू पुलिस थाने पहुंचने पर उसके पैरों में बंधी दूसरी बेड़ी भी कथित तौर पर अपने आप टूट गई। उस समय साथ चल रहे पुलिसकर्मियों ने खांपू से पूछा कि उसके पीछे कौन चल रहा है। खांपू को पीछे कोई दिखाई नहीं दिया, जबकि पुलिसकर्मियों को उसके पीछे एक व्यक्ति चलता हुआ नजर आ रहा था। मान्यता के अनुसार, वह व्यक्ति स्वयं देवता अजयपाल थे।

बताया जाता है कि दूसरी बेड़ी टूटने के बाद पुलिसकर्मियों ने इसे देवता का चमत्कार माना और खांपू को छोड़ दिया। बाद में खांपू को वही व्यक्ति मिल गया, जिसकी जमानत लेने के कारण उसे गिरफ्तार किया गया था। खांपू उसे पुलिस के हवाले कर आया। पुजारी के मुताबिक, उस समय देवता अजयपाल अपने भक्त की सहायता के लिए कुल्लू थाना पहुंचे थे और वहां कुछ देर विश्राम किया था। तभी से देवता के हर वर्ष थाना परिसर पहुंचकर विश्राम करने की परंपरा निभाई जा रही है।

पुजारी नूप राम ने बताया कि देवता अजयपाल अपनी पत्नी के साथ कांगड़ा जिले के बीड़ भंगाल से कुल्लू आए थे। शुरुआत में उन्होंने काइस धार में एक दिन बिताया, लेकिन वहां का स्थान उन्हें उपयुक्त नहीं लगा। इसके बाद वे पीज पहुंचे और फिर बागन गांव में विराजमान हुए।मान्यता के अनुसार, उस समय क्षेत्र में सूखा पड़ा हुआ था और लोग परेशान थे।

देवता के वहां आने के बाद अच्छी बारिश हुई और फसल भी बेहतर हुई। इसके बाद क्षेत्र में देवता का मंदिर बनाया गया। आज भी देवता अजयपाल के प्रति लोगों की गहरी आस्था है और कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान उनके विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक गतिविधियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

बाइट- नूप राम, पुजारी, देवता अजयपाल

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।