1026 में गजनी ने सोमनाथ मंदिर विध्वंस किया- पीएम मोदी
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सितंबर 27, नई दिल्ली: 'विरासत' एक ऐसा शब्द जो सिर्फ जिम्मेदारियों का एहसास नहीं कराता, बल्कि उसे सहेजकर रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की चुनौतियों से लड़ना भी सिखाता है और जब विरासत के साथ वास्तुकला भी जुड़ जाए तो इतिहास के पन्ने भी खुलने लगते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात में हमें इसी भाव से दो-चार कराया।
उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन के लिए जीवन समर्पित करने वाले अशोक सिंहल की जयंती पर नमन किया और सोमनाथ मंदिर से लेकर मोढेरा और तिरूचिरापल्ली के मनप्पारई के इतिहास को खूबसूरती के साथ लोगों के सामने रखा।रामजन्मभूमि आंदोलन को जो दिशा वीएचपी के लोकप्रिय चेहरे अशोक सिंहल ने दी। उनकी कहानी पीढ़ियां सुनती रहेंगी और सुनाती रहेंगी।
ऐसे ही महानुभाव अशोक सिंहल की आज 100वीं जयंती है। पीएम मोदी ने मन की बात में न सिर्फ उनके साधारण और समर्पित जीवन को नमन किया बल्कि ये कहा कि भव्य राममंदिर उनकी सोच और समर्पण की निशानी है। पीएम ने उनके साथ बिताए कुछ पलों का जिक्र किया।राममंदिर की बात छिड़ी तो सोमनाथ मंदिर का भी जिक्र आया और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की चर्चा भी पीएम ने की।
इसके पीछे की वजह को भी पीएम ने सामने रखा और कहा कि 1026 ईसवी में जब गजनी ने सोमनाथ का विध्वंस किया था उसी साल मोढेरा में सूर्य मंदिर को भी तोड़ा गया था। पीएम ने कहा कि इतने बड़े बड़े आक्रमणों के बावजूद आज ये विरासत उसी शान से खड़े हैं। पीएम ने कहा कि सभी लोग एक बार मोढेरा जरूर जाएं।पीएम ने अतीत से जुड़ाव की बात कहते हुए तिरुचिरापल्ला के मनप्पारई का जिक्र किया और ए.
सेल्वाराजू की मेहनत और समरर्ण की तारीफ की। विरासत के साथ विकास- पीएम मोदी के लगभग हर भाषण में इसका संगम सुनने को मिलता है। पीएम जितनी तकनीक की बात करते हैं उतनी ही परंपरा और भारत की विरासत को तवज्जो देते हैं और मन की बात में भी उनका ये संदेश फिर उभरकर सामने आ गया।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर 1026 में गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर के विध्वंस पर आधारित है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में उठाया। यह विषय धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर प्रकाश डालता है, जो भारत के इतिहास की जटिल परतों को दर्शाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे ऐतिहासिक घटनाएँ आज के राजनीतिक और सामाजिक संवाद को प्रभावित करती हैं, और सरकार की विरासत संरक्षण नीति पर सवाल उठाती हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि वे अपने सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूक हों, तथा भविष्य में ऐत