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11 देशों की महाशक्ति का सम्मेलन, भारत में स्वागत से गदगद हुए अफ्रीकी राष्ट्रपति

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
11 देशों की महाशक्ति का सम्मेलन, भारत में स्वागत से गदगद हुए अफ्रीकी राष्ट्रपति

राजधानी नई दिल्ली के आसमान से जब दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का विशेष विमान पालम एयरबेस की धरती पर उतरा तो नजारा देखने लायक था। जैसे ही राष्ट्रपति रामा फोसा सीढ़ियों से नीचे उतरे भारतीय परंपरा के मुताबिक उनका जोरदार और भव्य स्वागत किया गया और उसका वीडियो आपके सामने है।

केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने आगे बढ़कर जब हाथ मिलाया तो दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति के चेहरे पर एक बड़ी और सहज मुस्कान तैर गई। हाथ जोड़कर नमस्ते करते राष्ट्रपति रामाफोसा की यह मुस्कान सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी बल्कि यह भारत और दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक अटूट और भावनात्मक रिश्तों की सबसे ताजा तस्वीर और वीडियो है।

दिल्ली इस वक्त सज चुकी है। सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है और दुनिया का ध्यान सिर्फ एक जगह पर टिका है। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 दरअसल 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस दो दिवसीय महासम्मेलन के लिए दुनिया भर के राष्ट्रध्यक्षों और शीर्ष राजनायिकों का दिल्ली पहुंचना लगातार जारी है। अब दिल्ली एयरपोर्ट पर दिग्गजों का तांता लगा है।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरील लामा फोसा अपने उच्च स्तरीय डेलीगेशन के साथ दिल्ली पहुंच चुके हैं जो ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं। युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलूपो भी राजधानी पहुंची। इसे भी पढ़ें: आधी आबादी और...पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के बारे में क्या कहा?

सुनकर चौंकी दुनिया युगांडा ब्रिक्स के 10 प्रमुख साझेदार देशों में से एक है। कौशल विकास और उदमिता राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार जैन चौधरी ने दोनों स्वीस नेताओं की आगवानी की और भारत की ओर से आत्मी स्वागत किया। इसके अलावा उग्व के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन और नाइजीरिया के विदेश मंत्री बियांका और फिलीपींस के विदेश सचिव मारिया थेरेसा पी लाज़ारो भी सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंच चुके हैं।

राजधानी इस वक्त ग्लोबल डिप्लोमेसी की सबसे बड़ी धुरी बन चुकी है। साल 2026 में ब्रिक्स की कमान भारत के हाथों में है। भारत ने इस बार शिखर सम्मेलन की जो थीम तय की है वह पूरी दुनिया के वर्तमान हालात को देखते हुए बेहद प्रासंगिक है। लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण। भारत की इस अध्यक्षता के तीन सबसे बड़े राजनीतिक स्तंभ तय किए गए हैं।

पहला है ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंदी देना यानी विकासशील और अविकसित देशों के आर्थिक व सामाजिक हितों को वैश्विक मंचों पर प्रमुखता से उठाना। दूसरा है इनोवेशन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी भारत की यूपीआई और डिजिटल मॉडल। अब ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन को आसान बनाने की दिशा में काम करेगा।

का तीसरा है स्थिरता और सतत विकास। इसे भी पढ़ें: बुलेट ट्रेन की रफ्तार ...उधर होर्मुज में लगी आग, इधर जयशंकर ने आगे बढ़ने का दिखा दिया रास्‍ता जलवायु परिवर्तन, रिन्यूएबल एनर्जी और खाद्य सुरक्षा जैसे संकटों पर ठोस नीति बनाना। बता दें ब्रिक्स अब केवल पांच अक्षरों तक सीमित नहीं है। मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई के जुड़ने के बाद यह समूह 11 देशों का एक विशाल आर्थिक मंच बन चुका है।

अब 11 देशों की महाशक्ति और वैश्विक आंकड़े भी जान लीजिए। तो, इसका पहला पॉइंट है जनसंख्या की ताकत। दुनिया की कुल आबादी का करीब 49.5% हिस्सा ब्रिक्स देशों में रहता है। दूसरा है आर्थिक दबदबा। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में इस समूह की हिस्सेदारी लगभग 40% के पार पहुंच चुकी है। तीसरा है अंतरराष्ट्रीय व्यापार।

दुनिया के कुल मर्चेंडाइज ट्रेड का 26% हिस्सा ब्रिक्स देशों के नियंत्रण में है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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