15 से ज्यादा जिलों में फूड-कंट्रोलर ही नहीं, 30 पद-खाली:न राइस मिलरों पर कस पा रहा शिकंजा और न रुक पा रही राशन दुकानों में कालाबाजारी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →छत्तीसगढ़ का खाद्य विभाग कैसे चल रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 15 से ज्यादा जिलों में खाद्य नियंत्रक की नियुक्ति ही नहीं की गई है। इतना ही नहीं जिले से लेकर संचालनालय तक 30 से ज्यादा पद खाली है। इसका सीधा असर काम हो रहा है। राज्य का कोई भी जिला ऐसा नहीं है जहां राशन कार्ड में गड़बड़ी या राशन दुकानों का चावल खुले बाजारों में नहीं बेचा जा रहा है।
इतना ही नहीं हर जिले में बड़ी संख्या में राइस मिलरों ने कस्टम मिलिंग का पूरा चावल जमा नहीं किया है। ऐसे मिलरों की न तो बैंक गारंटी जब्त की गई और न ही उन्हें ब्लैक लिस्ट में डाला गया। मिलरों का दबाव अफसरों पर इतना रहता है कि पुराना चावल जमा करना बाकी रहता है और उनसे नया अनुबंध कर लिया जाता है।
प्रदेश के दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर और बस्तर में ही पूर्णकालिक खाद्य नियंत्रक नियुक्त हैं। बाकी जिलों में मेरिट लिस्ट की अनदेखी कर जूनियर सहायक खाद्य अधिकारियों को जिम्मेदारी दे दी गई है। अधिकतर जिलों में जिला सहायक खाद्य अधिकारी ही प्रभारी जिला खाद्य अधिकारी के पद पर काम कर रहे हैं।
इतना ही नहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली, कस्टम मिलिंग, धान खरीदी के काम को पूरा करने वाले विभाग के संचालनालय में अपर संचालकों के केवल चार पद भरे हैं। उसमें से भी नागरिक आपूर्ति निगम के लिए स्वीकृत पद खाली है। इस विभाग के दो अपर संचालक मंत्रालय और संचालनालय और एक अपर संचालक खाद्य आयोग में काम कर रहे हैं।
इस वजह से संचालनालय का काम भी बुरी तरह से प्रभावित है। ये पद करीब चार साल से खाली संचालनालय में संयुक्त संचालक के चारों पद खाली हैं। उपसंचालक/ खाद्य नियंत्रक के 7 पद स्वीकृत हैं। लेकिन इनमें तीन पद खाली हैं। खाद्य संचालनालय में 3 पद प्रमोशन के अभाव में खाली है। प्रदेश में खाद्य निरीक्षकों के 27 पद खाली है।
प्रमोशन में गड़बड़ी के चलते खाद्य संचालनालय में संयुक्त संचालक, उप संचालक और सहायक संचालक के पद भी खाली हैं। 2016 से 2020 तक पदोन्नति नहीं दी गई। संचालनालय के कुछ अफसरों की मोनोपल्ली की वजह से पूरा सिस्टम पटरी से उतर गया है। सहायक खाद्य अधिकारी से खाद्य अधिकारी बनने के लिए पांच साल का अनुभव अनिवार्य है।
लेकिन प्रदेश के लगभग 25 सहायक खाद्य अधिकारी पांच साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक जिला खाद्य अधिकारी नहीं बन पाए हैं। धमतरी जिले का मामला सबसे अलग, यहां बड़े पद वाले नीचे पोस्ट में काम कर रहे हैं धमतरी में करीब 10 साल से खाद्य नियंत्रक के पद को लेकर विवाद होता आया है।
यहां के खाद्य विभाग का सेटअप ही अजीब कर दिया गया है। धमतरी के खाद्य अधिकारी को संयुक्त संचालक पद पर एक साल पहले ही प्रमोशन दे दिया गया, लेकिन उन्हें वहां से हटाया नहीं गया। पिछले 25 साल से धमतरी में खाद्य निरीक्षक, सहायक खाद्य अधिकारी, खाद्य अधिकारी बनने वाले खाद्य अधिकारी को संचालनालय में नहीं रखा गया है।
धमतरी ऐसा जिला है जहां उच्च अधिकारी निचले पद में काम कर रहे हैं। सबसे बुरी स्थिति सहायक संचालक/ खाद्य अधिकारियों के पद की है। यहां 15 खाद्य अधिकारी पद खाली हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io