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15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने कप्तानी में दिखाया कमाल, पहला DRS रिव्यू बना मास्टरस्ट्रोक

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 अगस्त 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने कप्तानी में दिखाया कमाल, पहला DRS रिव्यू बना मास्टरस्ट्रोक

Duleep Trophy Semifinal 2026 : भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी क्रिकेटिंग समझ उम्र की सीमा से कहीं आगे है। महज 15 वर्ष की उम्र में दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन की कप्तानी संभालने वाले वैभव ने अपने पहले ही डीआरएस फैसले से सभी का ध्यान खींच लिया।

सेंट्रल जोन के खिलाफ मुकाबले के दौरान वैभव का पहला रिव्यू पूरी तरह सफल रहा। स्लिप में खड़े युवा कप्तान ने गेंद और बल्ले के संपर्क को भांपा और तुरंत डीआरएस लेने का फैसला किया। बाद में वीडियो रिप्ले में भी उनका अनुमान सही साबित हुआ और तीसरे अंपायर के निर्देश पर मैदानी अंपायर को अपना फैसला बदलना पड़ा।

ईशान किशन की चोट के बाद मिली कप्तानी बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के ग्राउंड-1 पर खेले जा रहे मुकाबले में शुरुआत में ईस्ट जोन की कप्तानी ईशान किशन कर रहे थे। हालांकि, पारी के 19वें ओवर के दौरान उनकी उंगली में चोट लग गई, जिसके बाद उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। ईशान के मैदान से बाहर जाने के बाद टीम की कमान उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी के हाथों में आ गई।

इसके साथ ही युवा खिलाड़ी को सीनियर स्तर के इस अहम मुकाबले में पहली बार कप्तानी करने का अवसर मिला। मैदान पर वैभव ने फील्डिंग में बदलाव करने, गेंदबाजों के साथ रणनीति तैयार करने और मैच की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की जिम्मेदारी संभाली। विकेटकीपिंग की भूमिका कुमार कुशाग्र ने निभाई।

40वें ओवर में लिया पहला DRS, फैसला निकला बिल्कुल सही मुकाबले का सबसे चर्चित पल सेंट्रल जोन की पारी के 40वें ओवर में देखने को मिला। तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने बल्लेबाज आर्यन जुयाल के खिलाफ कैच आउट की जोरदार अपील की, लेकिन मैदानी अंपायर ने बल्लेबाज को आउट नहीं दिया। स्लिप में मौजूद वैभव सूर्यवंशी को हालांकि पूरा भरोसा था कि गेंद बल्ले का किनारा लेकर गई है।

गेंदबाज ने भी कप्तान से रिव्यू लेने का आग्रह किया और वैभव ने बिना अधिक समय गंवाए डीआरएस का संकेत दे दिया। रिप्ले के दौरान अल्ट्राएज में गेंद के बल्ले के करीब से गुजरते समय स्पष्ट हलचल दिखाई दी। इसके बाद तीसरे अंपायर ने मैदानी अंपायर के फैसले को पलट दिया और आर्यन जुयाल को आउट घोषित कर दिया।

इस तरह वैभव सूर्यवंशी की कप्तानी में लिया गया पहला डीआरएस रिव्यू सफल साबित हुआ। आर्यन जुयाल 46 रन बनाकर लौटे पवेलियन सफल रिव्यू के बाद सेंट्रल जोन को बड़ा झटका लगा। आर्यन जुयाल 46 रन की पारी खेलकर पवेलियन लौटे। उनके विकेट के समय टीम का स्कोर 99 रन पर चार विकेट था।विकेट मिलने के बाद वैभव सूर्यवंशी का उत्साह भी देखने लायक था।

खास बात यह रही कि उन्होंने यह फैसला केवल तकनीक या स्टंप माइक्रोफोन की आवाज के आधार पर नहीं लिया, बल्कि स्लिप में खड़े होकर गेंद और बल्ले के बीच हुए संभावित संपर्क को समझते हुए रिव्यू मांगा। मैच के दौरान उनकी इस क्रिकेटिंग समझ की काफी सराहना हुई। उपकप्तान बनाए जाने पर भी उठे थे सवाल दलीप ट्रॉफी के लिए वैभव सूर्यवंशी को ईस्ट जोन का उपकप्तान बनाए जाने के फैसले ने पहले भी चर्चा बटोरी थी।

वजह यह थी कि युवा बल्लेबाज के पास फर्स्ट क्लास क्रिकेट का अनुभव अभी सीमित है। वैभव ने अब तक केवल नौ फर्स्ट क्लास मुकाबले खेले हैं। ऐसे में उन्हें इतने बड़े टूर्नामेंट में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलना कई लोगों के लिए हैरान करने वाला फैसला था।लेकिन ईशान किशन की चोट के बाद जब वैभव को मैदान पर कप्तानी करने का अवसर मिला, तो उन्होंने अपने शुरुआती फैसलों से संकेत दे दिया कि वह दबाव की स्थिति में भी आत्मविश्वास के साथ निर्णय ले सकते हैं।

बल्ले से नहीं चला था प्रदर्शन, गेंद से लिया था असर दलीप ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी बल्ले से बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे। उस मुकाबले में वह केवल आठ रन बनाकर आउट हो गए थे। हालांकि, उन्होंने गेंदबाजी में टीम के लिए योगदान दिया और दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए।

ईस्ट जोन ने उस मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए पारी और 210 रन के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। लगातार मजबूत हो रहा है वैभव का प्रदर्शन पिछले कुछ महीनों में वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट में तेजी से चर्चा का विषय बने हैं। घरेलू और युवा स्तर के मुकाबलों के साथ-साथ बड़े मंच पर भी उन्होंने कई प्रभावशाली पारियां खेली हैं।

आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए उनके प्रदर्शन ने क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद इंडिया-ए की ट्राई-सीरीज के फाइनल में श्रीलंका-ए के खिलाफ उन्होंने तेजतर्रार बल्लेबाजी करते हुए 29 गेंदों में 94 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का दम दिखाया। इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती मुकाबलों में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार वापसी की और लगातार दो अर्धशतक लगाए।

अब दलीप ट्रॉफी में कप्तानी के दौरान लिया गया उनका पहला सफल डीआरएस फैसला यह संकेत दे रहा है कि वैभव सूर्यवंशी केवल एक आक्रामक युवा बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि खेल को पढ़ने और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता रखने वाले खिलाड़ी भी हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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