अपराध

248 किलो डोडा पोस्त, 940 ग्राम अफीम जब्त, दो गिरफ्तार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 22 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
248 किलो डोडा पोस्त, 940 ग्राम अफीम जब्त, दो गिरफ्तार

भास्कर न्यूज|ब्यावर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और सदर थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एएनटीएफ महानिरीक्षक विकास कुमार की अगुवाई में टीम ने ब्यावर सदर थाना क्षेत्र में नाकाबंदी के दौरान एक कार से भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ पकड़ा।

पुलिस ने 248.140 किलो डोडा पोस्त चूरा और 940 ग्राम अफीम का दूध जब्त किया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि शातिर तस्कर चित्तौड़गढ़ से जोधपुर माल ले जा रहे थे। पुलिस और हाइवे की चैकिंग से बचने के लिए वे गांवों के कच्चे रास्तों का इस्तेमाल कर रहे थे। मकरेड़ा के पास पुलिस की नाकाबंदी देखकर तस्करों ने कार को भगाने की कोशिश की, जिससे कार रेलवे लाइन पुलिया की दीवार से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई।

पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड : पुलिस ने तस्करी के आरोप में जोधपुर के खोखरियां निवासी लेखाराम उर्फ पीपी (28) और जोधपुर ग्रामीण के केतु कलां (थाना चामू) निवासी सूर्यप्रकाश उर्फ सुरेश (26) को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी लेखाराम के खिलाफ चित्तौड़गढ़ और बालेसर में पहले से एनडीपीएस के मामले दर्ज हैं, जबकि दूसरा आरोपी सूर्यप्रकाश पूर्व में पुलिस पर फायरिंग के मामले में जेल जा चुका है।

पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। कार की गियर बॉक्स और डिग्गी में छिपाया था मादक पदार्थ पुलिस ने जब कार की तलाशी ली, तो डिक्की और पिछली सीट पर 14 कट्टों में भरा डोडा चूरा मिला। वहीं, गियर बॉक्स के पास टेप से चिपकाकर छिपाया गया अफीम का दूध भी बरामद किया गया। आरोपियों की ओर से वाहन पर फर्जीवाड़ा करने का प्रयास भी सामने आया है।

कार पर आरजे 37 सीबी 5389 नंबर प्लेट लगी थी, जबकि सीट के पीछे आरजे 19 सीजे 9255 की दो अन्य नंबर प्लेटें छिपाकर रखी गई थी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ जनता का संदेश का मत

नशीले पदार्थों के तस्करों को पकड़कर समाज ने एक महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है, परंतु यह हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने जीवन को स्वस्थ और नैतिक मूल्यों पर आधारित बनाना चाहिए। अगर किसी को नशे की लत लगती है, तो परिवार और समाज की सहानुभूति से सहायता माँगें, न कि अपराध की ओर मुड़ें। नशे से मुक्ति के लिए शिक्षा, रोजगार और परामर्श कार्यक्रमों को बढ़ावा दें, ताकि हर व्यक्ति स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर हो सके।

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