25 वर्ष की सेवा यात्रा ने बदली शासन की कार्यसंस्कृति, ‘जनसेवा से राष्ट्रसेवा’ बना मोदी युग का मूल मंत्र: अखिलेश कपूर
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अक्तूबर 08, कुल्लू (हिमाचल प्रदेश): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश कपूर ने कहा कि 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई। यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि शासन में निरंतरता, जवाबदेही और जनभागीदारी के बदलते स्वरूप की यात्रा भी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 25 वर्षों की इस यात्रा में गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक की जिम्मेदारी निभाई है। अखिलेश कपूर ने कहा कि 25 वर्ष सत्ता के नहीं, संकल्प की निरंतरता के हैं। लोकतंत्र में इतने लंबे समय तक सरकार के मुखिया के रूप में लगातार सेवा करना अपने आप में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक जीवन का पड़ाव है।
उन्होंने कहा कि गुजरात में स्वागत (SWAGAT) जैसे जनशिकायत समाधान के प्रयोग से लेकर केंद्र में प्रगति (PRAGATI), जनधन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, किसान कल्याण, महिला सशक्तिकरण, युवा उत्थान और आधारभूत ढांचे के विस्तार तक शासन की तकनीक और नागरिक सेवाओं को अधिक प्रत्यक्ष बनाने पर जोर दिखाई देता है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के 25 वर्ष पूरे होने पर जारी प्रस्ताव में भी इन पहलों को मोदी सरकार की प्रमुख पहलों के रूप में रेखांकित किया गया है। कपूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्ष की यात्रा को तीन शब्दों में समझा जा सकता है-“सेवा, संकल्प और सतत प्रयास।” उन्होंने कहा कि गुजरात से दिल्ली तक की यात्रा में परिस्थितियां बदलीं, चुनौतियां बदलीं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने की निरंतरता बनी रही।
2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार के मुखिया के रूप में 8,931 दिन पूरे करते हुए भारत के निर्वाचित सरकार के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रमुख का रिकॉर्ड भी पार किया था। अखिलेश कपूर ने कहा कि 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता का संकल्प होना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी इस लक्ष्य के लिए निरंतर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष पूरे होना पड़ाव है, विराम नहीं। भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और सक्षम राष्ट्र बनाने का संकल्प आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी भी है। आज आवश्यकता है कि सेवा की इस भावना को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाया जाए।