राजनीति

2nd वर्ल्डवॉर के बाद पहली बार जर्मनी में आ सकती है दक्षिणपंथी सरकार, चांसलर मर्ज की पार्टी को बड़ा झटका

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 9 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
2nd वर्ल्डवॉर के बाद पहली बार जर्मनी में आ सकती है दक्षिणपंथी सरकार, चांसलर मर्ज की पार्टी को बड़ा झटका

जर्मनी में दक्षिणपंथी सरकार अस्तित्व में आ सकती है.

दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी ने पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट के चुनाव में बड़ी जीत हासिल की. पार्टी को 43.8 प्रतिशत वोट मिले हैं. यह 5 साल पहले के मुकाबले दोगुने से अधिक है.

हालांकि, सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से एएफडी 3 सीट दूर है. एएफडी राज्य की इकलौती सबसे बड़ी पार्टी है.

बता दें, एएफडी अकेले सत्ता में आना चाह रही थी लेकिन उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया.

खास बात है कि एएफडी जर्मनी में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार किसी राज्य में दक्षिणपंथी सरकार बनाने की कोशिश में जुटी हुई है. एएफडी ने अल्पमत सरकार बनाने की संभावना खारिज कर दी है.

खास बात है कि दूसरी पार्टियों के लिए भी एएफडी के बिना स्थिर सरकार चलाना मुश्किल होगा.

चांसलर मर्ज की पार्टी CDU को बड़ा झटका सैक्सोनी-आनहाल्ट पिछले 24 साल से CDU का गढ़ रही है. CDU जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पार्टी है. अपने अभेद्य किले में CDU इस बार सिर्फ 15 सीटें ही जीत पाई है.

इसके अलावा, सोशल डेमोक्रेट्स को 9.3%, ग्रीन्स को 8.9% और लेफ्ट पार्टी को 8.6% वोट मिले हैं. तीनों ही पार्टी को 8-8 सीटें मिली हैं. इसके अलावा, BSW पार्टी को 5.3% वोटों के साथ 5 सीटें मिलीं हैं.

विधानसभा चुनाव में 77.8% वोटिंग हुई है.

सामने आए AfD-CDU नेताओं के बयान चुनाव परिणाम के बीच पार्टी नेताओं के बयान सामने आने लगे हैं.

AfD की नेता एलिस वीडेल ने कहा कि हमारी पार्टी को सरकार बनाने का स्पष्ट जनादेश मिला है.

इसके अलावा, CDU की महासचिव फ्रांजिस्का हॉपरमैन ने कहा कि उनकी पार्टी AfD के साथ काम नहीं करेगी.

AfD को उसने दक्षिणपंथी चरमपंथी पार्टी बताया और रूस के साथ उनके करीबी रिश्तों की आलोचना की. AfD की नीतियां क्या हैं? बता दें, प्रवासन के खिलाफ AfD का रुख सख्त है.

पार्टी रिमिग्रेशन यानी प्रवासियों को वापस भेजने के लिए काम कर रही है.

पार्टी बड़े पैमाने पर निर्वासन और जर्मनी आने के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन को खत्म करना चाहती हैं.

इसके अलावा, पार्टी राज्य में होम-स्कूलिंग को अनुमति, स्कूलों में राष्ट्रीय झंडा लगाने और सरकारी संस्थानों में कुछ नीतिगत बदलाव चाह रही है. पार्टी टैक्सपेयर्स के पैसे को यूक्रेन को देने की आलोचना करती है.

साथ ही पार्टी रूस पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग भी कर रही है.

भले ही पार्टी राज्य में सरकार बना ले लेकिन वे विदेश नीति को नहीं बदल सकती क्योंकि यह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है.

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

जनता का संदेश की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।