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30 साल की सेवा वाले 125 शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी:नालंदा में 298 की सूची जारी फिर भी नाम गायब; संघ बोला- फाइल अलमारी में धूल फांक रही

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
30 साल की सेवा वाले 125 शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी:नालंदा में 298 की सूची जारी फिर भी नाम गायब; संघ बोला- फाइल अलमारी में धूल फांक रही

नालंदा जिले में 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके प्रारंभिक शिक्षकों की सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन (10/20/30) योजना के तहत प्रोन्नति का मामला पिछले एक साल से लंबित है। तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 27 सितंबर 2025 को 298 शिक्षकों की सूची जारी की थी। वहीं, कुल 423 आवेदनों में बिहार अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षक संघ की ओर से भेजे गए 125 शिक्षकों में से किसी का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया।

संघ का आरोप है कि पात्र शिक्षकों की सेवा पुस्तिका वाली फाइल विभाग की अलमारी में पड़ी है, जबकि नियमों को दरकिनार कर कुछ खास लोगों को योजना का लाभ दिया गया। 125 शिक्षकों की सेवा पुस्तिका जमा करने का दावा संघ के जिलाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि 26 जुलाई 2025 को 125 शिक्षकों की सेवा पुस्तिका और सूची डीईओ कार्यालय में आधिकारिक रूप से जमा की गई थी।

इसके बावजूद 27 सितंबर को जारी 298 शिक्षकों की सूची में इन शिक्षकों का नाम नहीं था। संघ का आरोप है कि कार्यालय के कर्मियों की लापरवाही के कारण इन शिक्षकों की फाइल दबाकर रखी गई है। इससे पात्र शिक्षक अपने वैधानिक लाभ से वंचित हैं। डीएम और डीईओ को सौंपा ज्ञापन नाम सूची में शामिल नहीं होने और लगातार देरी से शिक्षकों में नाराजगी है।

संघ के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी उदिता सिंह और डीईओ हेमचंद्र से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है। संघ ने मांग की है कि 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सभी 125 शिक्षकों को जल्द सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन का लाभ दिया जाए। साथ ही मामले में जानबूझकर लापरवाही बरतने वाले संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

जांच के बाद जल्द मिलेगी सेवा पुस्तिका जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र ने कहा कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई पूरी कर संबंधित शिक्षकों को जल्द उनकी सेवा पुस्तिका उपलब्ध करा दी जाएगी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ जनता का संदेश का मत

शिक्षा के क्षेत्र में न्याय की कमी से न केवल शिक्षकों का मनोबल टूटता है, बल्कि समाज की प्रगति भी ठहर जाती है। जब प्रोन्नति की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता की कमी होती है, तो यह हमें याद दिलाती है कि हर व्यक्ति के प्रयासों को मान्यता देना हमारा कर्तव्य है। हमें नीतियों में सुधार के लिए सक्रिय रूप से आवाज़ उठानी चाहिए, ताकि सभी शिक्षकों को उनके योग्य सम्मान और अवसर मिलें, और समाज में समानता और प्रेरणा की संस्कृति स्थापित हो।

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