भोपाल

36 दिन से सड़क पर डटे हड़ताली शिक्षक: महिलाएं बोलीं- पीरियड्स में भी रोड पर सो रहे; वॉशरूम बहुत दूर है, कई को इंफेक्शन - Madhya Pradesh News

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 👁️ 10 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
36 दिन से सड़क पर डटे हड़ताली शिक्षक:  महिलाएं बोलीं- पीरियड्स में भी रोड पर सो रहे; वॉशरूम बहुत दूर है, कई को इंफेक्शन - Madhya Pradesh News

पिछले 36 दिनों से मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक पदवृद्धि की मांग लेकर भोपाल में धरने पर बैठे हैं, जिसमें इंदौर से आई शिक्षिका रुचि सैनी ने अपने अनुभवों से महिलाओं की विशेष कठिनाइयों को उजागर किया है। यह आंदोलन 36 दिन से जारी है, जहाँ शिक्षक सड़क पर रहकर अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं; मुख्य मांगें वेतन वृद्धि, पदोन्नति और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता हैं।

रुचि सैनी ने बताया कि पीरियड्स के दौरान उन्हें दूरस्थ वॉशरूम की समस्या का सामना करना पड़ता है, जिससे दर्द और संक्रमण की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई महिला शिक्षिकाएँ इसी कारण से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का शिकार हो रही हैं। इसी प्रकार, दीप्ति सिंह ठाकुर ने कहा कि धरनास्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर ही एक सार्वजनिक शौचालय है, जिससे उन्हें कई दिनों तक नहाने‑स्नान की सुविधा नहीं मिल पाती।

धरनास्थल पर रहने वाले शिक्षक रात‑रात खुले में सोते हैं; कुछ ने बताया कि बारिश में पॉलिथीन के नीचे जगह बनाकर सोना पड़ता है, जबकि अन्य को गाड़ियों के गुजरने से उत्पन्न शोर और धूल से जूझना पड़ता है। भोजन की भी कमी है—एक शिक्षक ने कहा कि उन्हें चाय नहीं मिल रही, जबकि पास में कुत्तों को दूध पिलाया जा रहा है। कई शिक्षकों ने बताया कि बारिश में आटे का आधा हिस्सा भीग कर बर्बाद हो गया, जिससे पोषण की स्थिति और बिगड़ गई।

बच्चों की चिंता भी इस आंदोलन में प्रमुख है। कई शिक्षकों की छोटी‑बच्ची वीडियो कॉल के माध्यम से पिता की वापसी का इंतजार कर रही है। एक शिक्षक ने बताया कि उसकी दो‑साल की बेटी रोज पूछती है, “पापा कब आओगे?” यह भावनात्मक तनाव न केवल शिक्षकों बल्कि उनके परिवारों पर भी गहरा असर डाल रहा है।

सुरक्षा की दृष्टि से भी कई समस्याएँ सामने आई हैं। रात में सड़क किनारे सोने वाली महिला शिक्षिकाओं को असुरक्षा का अनुभव होता है; कुछ ने बताया कि अनजाने में पास से गुजरने वाले लोग टिप्पणी करके उन्हें परेशान करते हैं। इस कारण से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है, जबकि शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।

पोलिस ने इस आंदोलन को लेकर कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली। पुलिस ने कहा कि वह इस मुद्दे को समझते हुए संबंधित विभागों को सूचित कर रहे हैं और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था के लिए दबाव बना रहे हैं। हालांकि, अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

शिक्षक संघों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है और सरकार से तत्काल समाधान की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार की असुविधाएँ जारी रहें तो आंदोलन का दायरा और भी बढ़ सकता है, जिससे शैक्षणिक कार्यों पर भी असर पड़ेगा। कई शिक्षक भूख हड़ताल भी कर रहे हैं; राजगढ़ के नरेंद्र राजपूत ने बताया कि वह 17 दिन तक भूख हड़ताल पर रहे, जिसमें 12 दिन निर्जल अनशन भी शामिल था।

नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने पर साथियों ने उन्हें पानी पिलाया, जिससे निर्जल अनशन टूट गया, पर उनका उपवास जारी रहा। दीप्ति सिंह ठाकुर के अनुसार, नरेंद्र तीन बार बेहोश हुए, और साथी उन्हें बचाने के लिए पानी डालने के अलावा कोई चिकित्सा सहायता नहीं दे पाए। यह स्थिति आंदोलन की तीव्रता और प्रतिभागियों की शारीरिक स्थिति को दर्शाती है।

इस आंदोलन का सामाजिक प्रभाव स्पष्ट है: शिक्षकों की बुनियादी मानवाधिकारों की अनदेखी से सार्वजनिक असंतोष बढ़ रहा है, और यह मुद्दा शिक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर रहा है। प्रशासनिक पक्ष से अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं मिलने के कारण, कई नागरिक और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर समर्थन व्यक्त किया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

भविष्य में, यदि सरकार शीघ्रता से वेतन वृद्धि, पदोन्नति और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं करती, तो इस आंदोलन का विस्तार और अधिक क्षेत्रों में हो सकता है, जिससे शैक्षणिक कार्यों में व्यवधान और सामाजिक अस्थिरता बढ़ेगी। इस स्थिति में, सभी पक्षों को मिलकर संवाद स्थापित कर समाधान निकालना आवश्यक होगा, ताकि शिक्षकों की मांगें पूरी हों और उनके अधिकार सुरक्षित रहें।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर मध्य प्रदेश के शिक्षकों के 36‑दिन के धरने के बारे में है, जहाँ वे वेतन, पदोन्नति और बुनियादी सुविधाओं की माँग कर रहे हैं। इस आंदोलन में इंदौर की शिक्षिका रुचि सैनी ने महिलाओं के विशेष कठिनाइयों, जैसे पीरियड्स के दौरान सड़क पर सोने और दूर वॉशरूम की समस्याओं को उजागर किया। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शैक्षिक क्षेत्र की कार्य स्थितियों और लैंगिक असमानताओं को सामने लाता है, जो शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित करता है। आम जनता पर इसका असर शिक्षा प्रणाली में सुधार की मां

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।