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95 साल बाद जनगणना में जाति पूछी जाएगी:यूपी-पंजाब समेत 5 चुनावी राज्यों में फिलहाल नहीं; बाकी देश में 25 जनवरी से 28 फरवरी तक

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
95 साल बाद जनगणना में जाति पूछी जाएगी:यूपी-पंजाब समेत 5 चुनावी राज्यों में फिलहाल नहीं; बाकी देश में 25 जनवरी से 28 फरवरी तक

देश में जनगणना का दूसरा फेज 25 जनवरी 2027 से शुरू होगा, जो 28 फरवरी तक चलेगा। इस बार 40 सवाल पूछे जाएंगे। जनगणना का घरों की गिनती का पहला फेज जून 2026 में पूरा हो चुका है। बड़ी बात ये कि 95 साल बाद यानी 1931 के बाद पहली बार देश में जाति की गिनती हो रही है। 5 राज्यों मणिपुर, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड को छोड़कर पूरे देश में जनगणना होगी।

इन राज्यों में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। बर्फबारी वाले क्षेत्रों- लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी जनगणना नहीं होगी। सरकार की अधिसूचना के मुताबिक 10 से 24 जनवरी 2027 तक आप खुद पोर्टल पर डेटा भर सकते हैं। ये भारत की पहली डिजिटल जनगणना है। रेफरेंस डेट 1 मार्च 2027 को रात 12 बजे होगी।

इन राज्यों में जनवरी-फरवरी में जनगणना नहीं तीन स्टेप में प्रक्रिया होगी गृह मंत्रालय के तहत रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया। सेंसस एक्ट 1948 की धारा 3 के तहत आदेश जारी हुआ है। करीब 30 लाख गिनती करने वाले और सुपरवाइजर टैबलेट/मोबाइल ऐप से डेटा लेंगे। जनगणना के दौरान तीन स्टेप फॉलो करने होंगे।

पहला आप चाहें तो खुद ऑनलाइन भर दें, फिर प्रगणक आपके घर आएगा और आखिर में 5 दिन का रिवीजन राउंड होगा, ताकि कोई भी व्यक्ति न छूटे। जनगणना के लिए ₹11,718 करोड़ का बजट मंजूर केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। जनगणना पूरे देश में केंद्र के समन्वय से होगी।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें इसके क्रियान्वयन में मदद करेंगी। देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत होगी।

केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना पहले 2021 में होने वाली थी। इसे कोरोना महामारी के कारण टाल दिया गया था।

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📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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