आधुनिक तकनीक से मजबूत होंगी भारतीय सेनाएं, रक्षा मंत्रालय की बैठक में बनी रणनीति
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भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण पर जैसलमेर में मंथन, 2029 तक रक्षा उत्पादन का लक्ष्य 3 लाख करोड़, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिलेगी मजबूती, राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक, रक्षा राज्यमंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने बैठक में रखे विचार।
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03 नवंबर, जैसलमेर/रांची: राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ सहित लोकसभा और राज्यसभा के सांसद तथा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में भारतीय सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार भारतीय सेनाओं को आधुनिक तकनीक से लैस और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने वर्ष 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया।
इस दौरान थल सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमता बढ़ाने, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक हथियारों के विकास और ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा तथा अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। डीआरडीओ, निजी उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन 46 हजार 429 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, रक्षा निर्यात भी बढ़कर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
बैठक में रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के साथ सैन्य आधुनिकीकरण की योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।