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’आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर आएगा बस्तर, पीड़ितों को मिलेंगे कृत्रिम हाथ-पैर - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा’

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
’आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर आएगा बस्तर, पीड़ितों को मिलेंगे कृत्रिम हाथ-पैर - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा’

रायपुर, 4 अक्टूबर, 20226

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि बस्तर अब आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर निकलने को तैयार है। वर्षों तक नक्सल हिंसा के दौर में बस्तर के अनेक इलाकों में सड़कों, नदी-तालाबों के किनारे और स्कूलों के आसपास लगाए गए आईईडी की चपेट में सुरक्षाबलों के जवानों के साथ आम नागरिक और पशु भी आए।

कई नागरिकों ने इन विस्फोटों में अपने हाथ-पैर गंवाए और आज भी दिव्यांगता के साथ कठिन जीवन जी रहे हैं। जिनकी वेदना को कम करने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ शासन भी लगातार प्रयासरत है। ऐसे लोगों के जीवन की मुश्किलें कम करने के उद्देश्य से बस्तर संभाग में दो चरणों में विशाल निःशुल्क दिव्यांग सेवा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

पहला तीन दिवसीय शिविर 5, 6 और 7 अक्टूबर को बस्तर के जिला मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित होगा। इसमें बस्तर, कांकेर, नारायणपुर और कोण्डागांव जिले के दिव्यांगजन भी शामिल होंगे। दूसरा शिविर 15, 16 और 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आयोजित किया जाएगा, जिसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के हितग्राहियों को लाभ मिलेगा। इन शिविरों में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के तकनीकी सहयोग से जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

’जगदलपुर शिविर के लिए 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित’

शिविर की तैयारियां बड़े स्तर पर की जा रही हैं। उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार जगदलपुर में आयोजित होने वाले शिविर के लिए चार जिलों में कुल 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित किए गए हैं। इनमें बस्तर के 1,570, कोण्डागांव के 1,080, कांकेर के 236 और नारायणपुर के 67 दिव्यांगजन शामिल हैं।

समाज कल्याण विभाग के सहयोग से दिव्यांगों की अन्य सहायक उपकरण जैसे श्रवण यंत्र, वैशाखी, स्मार्ट छड़ी, वॉकिंग स्टिक, छड़ी, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स एवं दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी उपकरणों का भी वितरण किया जाएगा।

’आईईडी पीड़ितों को कृत्रिम हाथ-पैर देकर जीवन आसान करने का प्रयास’

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आईईडी किसी को पहचानता नहीं था। उसकी चपेट में कभी जवान आए, कभी आम नागरिक और कभी पशु। जिन नागरिकों ने विस्फोटों में अपने पैर या हाथ गंवाए, उनका जीवन बच तो गया, लेकिन उन्हें वर्षों से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अब प्रयास है कि ऐसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी जरूरत के अनुरूप कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया जाए।

’आईईडी मुक्त बस्तर के साथ ही आईईडी के प्रभावितों के साथ भी सरकार’

श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद की समाप्ति के बाद ना सिर्फ बस्तर को आईईडी के भय से मुक्त कराने बल्कि आईईडी से प्रभावितों के साथ भी खड़ी है। शिविर में आईईडी विस्फोट से दिव्यांग हुए नागरिकों को विशेष रूप से चिन्हांकित कर उनकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम पैर (जयपुर फुट), कृत्रिम हाथ तथा अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही अन्य कारणों से दिव्यांग हुए लोग भी शिविर का लाभ ले सकेंगे। विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण और नाप लेकर आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग तैयार करने तथा पुराने अथवा क्षतिग्रस्त कृत्रिम अंगों की मरम्मत की व्यवस्था भी शिविर में रखे जाने की जानकारी सामने आई है।

’ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक पंजीयन की व्यवस्था’

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों और विशेष रूप से आईईडी विस्फोट पीड़ितों से शिविर में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हितग्राही अपने जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। ग्राम सभाओं में भी ऐसे हितग्राहियों के नाम ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से पंजीयन कर जनपद और जिला पंचायत तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश पूर्व पंजीयन नहीं हो पाया हो तो जरूरतमंद व्यक्ति सीधे शिविर में भी पहुंचें। शिविर में आने वाले हितग्राहियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की जाएगी।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

बस्तर में आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर निकलने का निर्णय उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लिया है, जिससे घायल नागरिकों को कृत्रिम अंग मिलेंगे। यह कदम नक्सल संघर्ष के दौरान बस्तर के कई इलाकों में फंसे नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों को मिली चोटों के बाद आता है। इस खबर का महत्व यह है कि यह क्षेत्र में शांति और पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आम जनता पर इसका असर यह होगा कि घायल लोगों की पुनर्वास प्रक्रिया तेज होगी, आर्थिक और सामाजिक रूप से वे फिर से सक्रिय हो सकेंगे, और क्षेत्

🎙️ जनता का संदेश का मत

आईईडी विस्फोटों से प्रभावित बस्तर के लोगों को सहारा देने के लिए समाज को एकजुट होकर सहायता करनी चाहिए। न केवल भौतिक उपचार, बल्कि मनोवैज्ञानिक समर्थन और रोजगार के अवसर भी ज़रूरी हैं। पीड़ितों के लिए समावेशी शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करें, ताकि वे अपनी क्षमताओं से समाज में योगदान दे सकें। हिंसा के विकल्प के रूप में संवाद, कानूनी सहायता और शांति निर्माण को बढ़ावा दें, जिससे भविष्य में ऐसे दुखों से बचा जा सके।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।