राजनीति

आकाश के लिए ससुर ने राजनीति छोड़ी:कहा- बहनजी के लिए जान दे सकता हूं, मायावती की शर्त थी- राजनीति छोड़ो, तभी भतीजे को लूंगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
आकाश के लिए ससुर ने राजनीति छोड़ी:कहा- बहनजी के लिए जान दे सकता हूं, मायावती की शर्त थी- राजनीति छोड़ो, तभी भतीजे को लूंगी

बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास ले लिया। उन्होंने गुरुवार सुबह ‘X’ पर लिखा- मैं इसी वक्त राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहा हूं। मेरा जीवन बहनजी का ऋणी है। ऐसे में संन्यास तो बहुत छोटी चीज है। आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े, तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी।

दरअसल, मायावती ने बुधवार को भतीजे आकाश की बसपा में वापसी के लिए एक शर्त रखी थी। दोपहर 2:46 बजे ‘X लिखा था- पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ अगर अपने दामाद आकाश का भला चाहते हैं तो उन्हें राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। तभी आकाश को फ्री हैंड मिलेगा। आकाश अपने ससुर के स्वार्थी व्यवहार का खामियाजा भुगत रहे हैं।

मायावती के इस बयान के 17 घंटे बाद अशोक सिद्धार्थ ने भावुक पोस्ट लिखी। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु बताते हुए दामाद के लिए राजनीति छोड़ने का ऐलान किया। इसके बाद माना जा रहा है कि मायावती जल्द ही आकाश को पार्टी में उनकी पुरानी जिम्मेदारियां सौंप सकती हैं। मायावती ने आकाश को 7 दिन पहले पद से हटाया था।

उन्होंने कहा था- आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। फिलहाल, आकाश पार्टी में एक आम समर्थक की हैसियत से जुड़े हैं। 2 अगस्त को पार्टी से निकाला था, कहा था- बार-बार चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरे आकाश की वापसी के लिए मायावती ने क्या शर्त रखी थी, पढ़िए इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- कौन हैं अशोक सिद्धार्थ?

--------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें- मायावती ने 'अनुभवहीन' ईशान को जिम्मेदारी क्यों सौंपी:क्या चुनाव में लॉन्च करेंगी, BSP का उत्तराधिकारी कौन होगा बसपा से आकाश आनंद के बाहर किए जाने और ईशान आनंद की एंट्री ने पार्टी के भविष्य को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने पहले आकाश को आगे बढ़ाकर नई पीढ़ी को नेतृत्व देने का मॉडल पेश किया। फिर अचानक अपरिपक्व बताकर पर कतर दिए। साथ ही सबको चौंकाते हुए उन्होंने अनुभवहीन ईशान को 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपकर नई बहस छेड़ दी है। पढ़ें पूरी खबर

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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