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आम आदमी की जिंदगी आसान होनी चाहिए, मुश्किल नहीं- दिव्येंदु शर्मा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
आम आदमी की जिंदगी आसान होनी चाहिए, मुश्किल नहीं- दिव्येंदु शर्मा

डिजिटल डेस्क, भोपाल। रेलवे का कन्फर्म टिकट पाने की जद्दोजहद से शायद ही कोई यात्री अनजान हो। बुकिंग खुलते ही सीटें खत्म हो जाना और इसके बाद एजेंटों के जरिए टिकट मिलना, यात्रियों के लिए अक्सर परेशानी का सबब बनता है। इसी समस्या को अपराध और रहस्य की कहानी से जोड़ती है वेब सीरीज ‘वेटिंग है’।

पटना की पृष्ठभूमि पर बनी इस सीरीज में रेलवे टिकटों की कालाबाजारी और उसके पीछे चल रहे खेल को दिखाया गया है। दिव्येंदु शर्मा और भुवन अरोड़ा स्टारर यह क्राइम-सस्पेंस सीरीज प्राइम वीडियो और एमएक्स प्लेयर पर स्ट्रीम हो रही है। सीरीज में दिव्येंदु एक अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। अपने किरदार, कहानी और रेलवे टिकट के इस अनोखे विषय को लेकर दिव्येंदु शर्मा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की।

टिकट घोटाले पर अब तक नहीं बनीं कोई कहानी मैं खुद कभी इस तरह की परेशानी का शिकार नहीं हुआ हूं, लेकिन ऐसी बहुत सी घटनाओं के बारे में सुनते रहते हैं और कई लोग इससे गुजर चुके हैं। इसलिए मुझे खुशी है कि ‘वेटिंग है’ जैसी सीरीज बनी। अगर मैं गलत नहीं हूं तो रेलवे टिकट घोटाले पर पहली बार कोई शो बनाया गया है।

अब समय आ गया है कि इस समस्या पर बात हो कि यह क्यों और कैसे होती है और इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता है। रोजाना लाखों लोग इस स्कैम का शिकार होते हैं। कहीं न कहीं अधिकारियों को भी इसमें बड़ी भूमिका निभानी होगी, ताकि ईमानदारी से टैक्स भरने वाले आम आदमी की जिंदगी आसान हो सके। हाल ही में एजेंट से निकलवाया टिकट इस सीरीज में कोई सुपरकॉप्स नहीं हैं।

यह एक बड़े साधारण लोगों के बीच की कहानी है जो हम रोजमर्रा की जिंदगी में झेल रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही मेरे घर की हाउस हेल्प को उनके गांव बिहार जाना था। एक इमरजेंसी थी लेकिन वह 10 दिन से टिकट बुक ही नहीं कर पायीं। ना नार्मल और ना ही तत्काल। आखिरकार हमें एक एजेंट के जरिए टिकट बुक करनी पड़ी और टिकट बुक हो गया।

सोचिए कितना बड़ा स्कैम है यह। इतने सालों से हम इसके बारे में सुनते आ रहे हैं लेकिन ताज्जुब है कि सरकारें इस पर कोई एक्शन नहीं ले रही हैं। पैसा नहीं बताता की फिल्म अच्छी है वेब सीरीज की तरह ही मिर्जापुर में भी लोगों ने मुन्ना भैया को पसंद किया, यह मेरे लिए बड़ी खुशी की बात है लेकिन यहां इससे यह बात भी साफ हो गयी है कि बॉक्स ऑफिस पर पैसा और नंबर्स नहीं बल्कि आज कंटेंट चलता है।

नंबर्स और बजट अब गिमिक की तरह पब्लिसिटी के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसी कई फिल्में भी हैं जो थिएटर्स में नहीं चलीं लेकिन जब ओटीटी पर आयीं तो छा गई और उन्हें बाद में कल्ट फिल्म कहा गया। आज मार्केटिंग पर ज्यादा जोर है। करोड़ों के बजट की बात होती है लेकिन कहानी पर ध्यान दें तो मुझे लगता है सिनेमा के लिए अच्छा है।

फिल्म की कमाई से ज्यादा मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि मुन्ना को लोग प्यार दे रहे हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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