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आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों से मिले सपा एमएलसी:बोले- सरकार हठधर्मिता नहीं छोड़ेगी तो छात्रों के साथ मिलकर ईंट से ईंट बजा देंगे

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों से मिले सपा एमएलसी:बोले- सरकार हठधर्मिता नहीं छोड़ेगी तो छात्रों के साथ मिलकर ईंट से ईंट बजा देंगे

प्रयागराज में आमरण अनशन पर बैठे टीजीटी पीजीटी अभ्यर्थियों से सोमवार को सपा एमएलसी मानसिंह यादव मिलने पहुंचे। शिक्षक भर्ती की पुरानी नियमावली बहाली की मांग को लेकर चल रहे अनशन को समर्थन दिया। इस दौरान धरना स्थल पर उन्होंने कहा कि यदि सरकार हठधर्मिता नहीं छोड़ती तो सपा छात्रों के साथ मिलकर ईंट से ईंट बजा देगी।

धरना स्थल पर क्या कहा मानसिंह यादव ने एमएलसी मानसिंह यादव ने कहा कि गरीब किसान और मजदूर परिवारों के बच्चे ब्याज पर कर्ज लेकर प्रयागराज में तैयारी करने आते हैं, लेकिन सरकार ने अचानक टीजीटी-पीजीटी के नियम बदलकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है। उनका कहना था कि अगर नया नियम लागू करना ही था तो कम से कम दो से तीन साल का संक्रमणकाल दिया जाना चाहिए था, ताकि अभ्यर्थी खुद को नई पात्रता मानदंडों के अनुसार तैयार कर पाते।

उन्होंने बेसिक शिक्षा में स्कूलों के मर्जर यानी कंपोजिट व्यवस्था पर भी तंज कसा और आरोप लगाया कि जूनियर और प्राइमरी स्कूलों को एक करने से हेडमास्टर के पद खत्म किए जा रहे हैं। जिससे करीब एक लाख प्राथमिक विद्यालय प्रभावित हुए हैं और रोजगार के अवसर घटे हैं। मानसिंह यादव ने कहा कि एक तरफ विश्वगुरु बनने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ वास्तविक गुरुओं (शिक्षकों) को अपनी जायज मांगों के लिए अनशन पर बैठना पड़ रहा है।

आर-पार की लड़ाई लड़ेगी सपा समाजवादी पार्टी इन अभ्यर्थियों को अकेला नहीं छोड़ेगी और सड़क से सदन तक कंधे से कंधा मिलाकर उनकी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार पुरानी व्यवस्था के तहत विज्ञापन जारी नहीं करती तो पार्टी छात्रों के साथ मिलकर आर-पार की लड़ाई लड़ेगी और जरूरत पड़ने पर ईंट से ईंट बजा दी जाएगी।

क्यों चल रहा है अनशन पांच अभ्यर्थी 48 घंटे से अधिक समय से आमरण अनशन पर हैं । उनकी मांग है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में करीब 20,000 से अधिक रिक्त पदों पर पुरानी नियमावली के तहत भर्ती विज्ञापन जारी हो। जिससे करीब सात लाख प्रभावित अभ्यर्थियों को प्रतियोगिता में शामिल होने का मौका मिल सके।

जब तक पुरानी नियमावली और पूर्व के परीक्षा पैटर्न के आधार पर नया विज्ञापन जारी नहीं होता, तब तक वे भूखे-प्यासे ही रहेंगे।

📡 स्रोत: NewsData.io

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