आरएसएस का वार्षिक विजयादशमी उत्सव आज, मोहन भागवत हुए शामिल
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20 अक्टूबर, नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस का वार्षिक विजयादशमी उत्सव आज नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन अवसर पर हुई थी। संघ के लिए यह पर्व केवल स्थापना की वर्षगाँठ नहीं, बल्कि शक्ति की उपासना, समाज जागरण और राष्ट्र को परम वैभव पर पहुँचाने के संकल्प का प्रतीक है। आरएसएस के विजयादशमी उत्सव में दैनिक जागरण के मुख्य संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। वहीं पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और मुंबई में इजरायल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले स्मृति मंदिर में सरसंघचालक मोहन भागवत और मुख्य संपादक संजय गुप्ता ने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव में नागपुर के रेशिमबाग मैदान में शस्त्र पूजन किया। संघ में दशहरे के मौके पर शस्त्र पूजन की परंपरा रही है।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशीली दवाएं घातक हैं, इसकी जानकारी होने के बावजूद लोगों को इनकी लत लग जाती है और यह एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन गई है।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस मौके पर अपने संबोधन में वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, पर्यावरणीय संकट और वर्चस्व की लड़ाई से उपजे संकटों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत के पास इन संकटों का उत्तर है।।। उन्होंने कहा कि विश्व में प्राकृतिक तनाव तो बढ़ ही रहे हैं भूराजनीतिक तनाव भी बढ़ रहे हैं।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने फ्रांस में चल रहे प्रोटेस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है। मोहन भागवत ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत को कमजोर करने और तोड़ने की कोशिश कर रही हैं. मोहन भागवत ने कहा कि रिजीम चेंज से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छार की तारीफ की। मोहन भागवत ने कहा कि उनका काम हिंदू स्वभाव के अनुरूप था।मोहन भागवत ने कहा कि जब प्रदर्शन जन कल्याण के बजाय अन्य उद्देश्यों से संचालित होते हैं, तो वे राजनीतिक हथियार बन जाते हैं और व्यक्तियों, समूहों या विचारधाराओं के प्रति विद्वेष भड़काते हैं।