आरसीडी का फैसला:सड़क-पुल टेंडर : 10 फीसदी से ज्यादा नीचे बोली लगाई तो टेंडर रद्द होगा
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →न्यूनतम दर सीमा लागू, कम दर पर टेंडर लेकर काम अटकाने की नहीं मिलेगी छूट बिहार में सड़क और पुल निर्माण के टेंडर में अब ठेकेदार मनमाने तरीके से कम दर पर टेंडर नहीं डाल सकेंगे। पथ निर्माण विभाग ने प्रतिशत दर निविदा (परसेंटेज रेट टेंडर) में न्यूनतम दर सीमा फिर से लागू कर दी है। इसके तहत प्राक्कलित दर से 10% से ज्यादा नीचे दर पर टेंडर भरने वाली एजेंसियों के टेंडर कैंसिल कर दिए जाएंगे।
इस संबंध में पथ निर्माण विभाग ने 13 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। विभाग ने वर्ष 2020 में जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत निविदाओं में न्यूनतम दर की सीमा समाप्त कर दी गई थी। अब 6 मार्च 2014 के आदेश के तहत 10% की न्यूनतम दर सीमा फिर बहाल कर दी गई है।
नई व्यवस्था में प्राक्कलित दर से कम पर बोली लगाने वाली एजेंसियों को अतिरिक्त कार्य प्रतिभू राशि (एडिशनल परफॉर्मेंस गारंटी) भी देनी होगी। प्राक्कलित दर से 0 से 5% तक कम दर देने पर प्रत्येक 1% की कमी के लिए 0.25% अतिरिक्त प्रतिभू राशि देनी होगी। वहीं, 5 से 10% तक कम दर देने पर प्रत्येक 1% की कमी के लिए 0.5% अतिरिक्त प्रतिभू राशि देनी होगी।
तकरीबन 250 करोड़ की लागत से कांटी- रघई घाट- नरवारा होते हुए शिवहर तक सड़क चौड़ीकरण होना है। तीन फेज में यह टेंडर है, जिसमें कांटी से रघई घाट व रघई घाट से नरवारा और नरवारा से शिवहर तक टेंडर निकला। कांटी से नरवारा तक का टेंडर 22 प्रतिशत नीचे जाकर अंबर इंफ्रा ने लिया। टेंडर लेने के बाद शुरूआत में ही काम को अटका दिया।
पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता ई गणेश जी की अनुशंसा पर एजेंसी को डिबार किया जा चुका है। इस वजह से यह एजेंसी जब तक इस काम को पूरा नहीं करेगी। बिहार में उसे कोई दूसरा काम नहीं मिलेगा। हालांकि, कांटी से नरवारा तक काम रफ्तार नहीं पकड़ रहा। इसी तरह की स्थिति मुजफ्फरपुर- पूसा रोड की है।
इस रोड का भी टेंडर 21 प्रतिशत कम जाकर लिया गया है। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस पर अंकुश लग सकेगा। इसका क्या असर होगा नई व्यवस्था से टेंडर हासिल करने के लिए बहुत कम दर पर बोली लगाने की होड़ पर रोक लगेगी। इससे उन एजेंसियों को राहत मिल सकती है, जो काम से किसी तरह से समझौता नहीं करने का वसूल के तहत लागत के करीब दर पर टेंडर भरती हैं और कम दर की वजह से प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाती हैं।
विभाग का यह फैसला निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने और ठेकेदारों की वित्तीय क्षमता पर दबाव कम करने के लिहाज से अहम है। बहुत कम दर पर टेंडर लेने के बाद काम की गुणवत्ता से समझौता करने या काम अधूरा छोड़ने की आशंका रहती है। अतिरिक्त प्रतिभूति राशि से ऐसी एजेंसियों पर वित्तीय जवाबदेही भी बढ़ेगी।
📡 स्रोत: NewsData.io