आरोप-सफदरजंग अस्पताल में एक ही वेंडर की मैनपावर सप्लाई:2014 में साईं कम्युनिकेशन को दी गई थी; पीएमओ, स्वास्थ्य मंत्रालय और सीबीआई से जांच की मांग
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देश के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल सफदरजंग अस्पताल में मैनपावर सप्लाई को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, अस्पताल में एडमिनिस्ट्रेटिव और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी 2014 में साईं कम्युनिकेशन को दी गई थी। शिकायतकर्ता ने अस्पताल प्रशासन और मैनपावर एजेंसियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया है।
उसने पीएमओ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और सीबीआई को शिकायत भेजकर मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में मैनपावर के टेंडर, कर्मचारियों के वेतन, जीएसटी भुगतान और बिलिंग की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। आरोप है कि 2014 के बाद कंपनी को लगातार एक्सटेंशन दिया गया और बिना नया टेंडर जारी किए वही कंपनी मैनपावर सप्लाई करती रही।
1700 कर्मचारियों की मंजूरी के बावजूद करीब 2150 कर्मचारी रखे गए शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मंत्रालय से 1,700 कर्मचारियों की मंजूरी के बावजूद करीब 2,150 कर्मचारी रखे गए। यानी करीब 450 कर्मचारी अतिरिक्त हैं। दावा है कि ये कर्मचारी कोरोना काल से ही काम कर रहे हैं और इनके लिए अब तक मंजूरी नहीं ली गई है।
वहीं, वेंडर रविंदर कुमार ने शिकायतकर्ता के आरोपों को गलत बताया। उनके मुताबिक, गौरीशा फैसिलिटीज को मार्च 2024 में टेंडर मिला था और पिछले सप्ताह 6 महीने का एक्सटेंशन मिला है। वहीं, साईं कम्युनिकेशन को साल 2023 में 2 साल के लिए टेंडर मिला था, जिसका अगस्त में एक्सटेंशन हुआ। अस्पताल की प्रवक्ता बोलीं- रोजाना 10 हजार से ज्यादा मरीज आते हैं सफदरजंग अस्पताल की प्रवक्ता साक्षी चुघ ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और नियमों के तहत जरूरत के मुताबिक आउटसोर्स मैनपावर को जारी रखा या बढ़ाया जाता है।
अस्पताल में रोजाना 10 हजार से ज्यादा मरीज आते हैं, इसलिए पर्याप्त मैनपावर जरूरी है। उन्होंने कहा कि नया टेंडर तय प्रक्रिया के तहत जारी किया जाएगा। एजेंसियों को सत्यापित उपस्थिति और दी गई सेवाओं के आधार पर नियमों के मुताबिक भुगतान किया जाता है। हर माह 10 करोड़ का भुगतान, जांच की मांग शिकायतकर्ता ने अस्पताल के अकाउंट्स विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
आरोप है कि मैनपावर के वेतन भुगतान के लिए कर्मचारियों के बैंक लेजर की जगह एक्सेल शीट का इस्तेमाल किया जा रहा है। वेंडर को हर माह करीब 10 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने कर
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सफदरजंग अस्पताल में मैनपावर सप्लाई के लिए 2014 में साईं कम्युनिकेशन को जिम्मेदारी दी गई थी, और अब आरोप है कि अस्पताल प्रशासन और मैनपावर एजेंसी के बीच सांठगांठ है। यह विषय सरकारी अस्पतालों में मानवीय संसाधन प्रबंधन और पारदर्शिता से जुड़ा है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, और सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार के दावे सामने आते हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि अस्पतालों में सेवाओं की उपलब्धता और दक्षता घट सकती है, जिससे
🎙️ जनता का संदेश का मत
सफदरजंग अस्पताल जैसी सार्वजनिक संस्थाओं में मैनपावर सप्लाई की पारदर्शिता अनिवार्य है। जब अनुबंधों में एक ही वेंडर को प्राथमिकता दी जाती है, तो यह भ्रष्टाचार का रास्ता खोलता है। हमें जवाबदेही और खुली प्रतिस्पर्धा की मांग करनी चाहिए। शिकायत करने वालों को कानूनी रास्तों से समर्थन दें, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके। इससे समाज में विश्वास और स्वच्छ प्रशासन की नींव मजबूत होगी।