'अभिजीत दीपके का महाराष्ट्र पुलिस पर यू-टर्न? बोले- अब एहसास कि परफेक्ट...'
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया.
प्रदर्शन की अगुवाई CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने की.
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा था.
प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र पुलिस की तारीफ की थी.
उन्होंने पुलिस के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक बात कही और उसे देश की बेहतरीन पुलिस बताया था. 2 अक्टूबर का प्रदर्शन बिना पुलिस अनुमति के आयोजित किए जाने के बाद मुंबई पुलिस ने CJP और 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज की है.
पुलिस ने बताया कि मामले में गैरकानूनी तरीके से भीड़ जुटाने और वैध आदेश की अनदेखी जैसे आरोप लगाए गए हैं.
अब दीपके ने महाराष्ट्र पुलिस पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के कुछ दिन बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महाराष्ट्र पुलिस को लेकर अपना रुख बदलने का संकेत दिया.
उन्होंने लिखा कि उन्हें अब एहसास हुआ है कि महाराष्ट्र पुलिस भी उतनी परफेक्ट नहीं है. दीपके ने आगे कहा कि वह अगले दिन दोपहर 12 बजे अपने घर से प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे.
हालांकि, उनके इस पोस्ट में महाराष्ट्र पुलिस को लेकर उनकी आपत्ति की पूरी वजह स्पष्ट नहीं की गई है.
यह बयान ऐसे समय आया है जब शिवाजी पार्क प्रदर्शन को लेकर पुलिस कार्रवाई और शिकायतों का मामला सामने आया है.
स्थानीय लोगों और एक वकील की शिकायत के बाद भी पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं.
शिवाजी पार्क प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद
CJP का यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर था. संगठन ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर भी सवाल उठाए हैं.
प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और विशाल ददलानी समेत कुछ सार्वजनिक हस्तियां भी शामिल हुई थीं.
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर महाराष्ट्र के चुनावी परिदृश्य में एक नई धारा को दर्शाती है, जहाँ कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने पुलिस की सराहना के साथ अपने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पुलिस और सरकार के बीच संबंधों पर सवाल उठाती है, तथा चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रकाश डालती है। आम जनता के लिए इसका असर यह है कि यह प्रदर्शन राजनीतिक जागरूकता बढ़ा सकता है, चुनावी दावों की विश्वसनीयता पर चर्चा को प्रोत्साहित कर सकता है, और नागरिकों को अपने अधिकारो