अभिजीत दीपके को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया, मरीन ड्राइव के पास हाथ में थीं तख्तियां
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके को मुंबई पुलिस ने कुछ देर के लिए हिरासत में लिया और कुछ देर के बाद छोड़ दिया.
मरीन ड्राइव के पास वह तख्तियां लिए नजर आए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया.
मुंबई में होने वाले सीजेपी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से एक दिन पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. सीजेपी शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन करने वाली है.
मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
इसके बाद दीपके ने विरोध प्रदर्शन के बजाय जेल भरो आंदोलन या सामूहिक गिरफ्तारी अभियान की घोषणा की थी.
सीजेपी के आशुतोष रांका ने अभिजीत दीपके को डिटेन किए जाने की खबर को फेक बताया है.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'फेक न्यूज. दीपके को हिरासत में नहीं लिया गया है.
वह मुंबई की सड़कों पर घूम रहे हैं.' अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और आगाह किया कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे और अक्टूबर के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन किया जाएगा.
News Alert!
CJP founder Abhijeet Dipke detained briefly by Mumbai police after being spotted with placards near iconic Marine Drive.
Press Trust of India (@PTI_News) October 1, 2026
विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल नहीं होगी सीजेपी
दीपके ने कहा कि सीजेपी 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल नहीं होगी और यह एक स्वतंत्र आंदोलन रहेगा.
उन्होंने कहा, 'सीजेपी सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को शहर के दादर इलाके के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करेगी. ज्ञानेश कुमार देशद्रोही हैं.
उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलना चाहिए.'
<p style="text-ali
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
अभिजीत दीपके, कॉकरोज जनता पार्टी के संस्थापक, को मुंबई पुलिस ने मरीन ड्राइव के पास तख्तियों के साथ दिखाई देने पर हिरासत में लिया। यह घटना सीजेपी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से एक दिन पहले हुई, जब पार्टी का उद्देश्य शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को विरोध करना था। इस कदम को पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के दृष्टिकोण से लिया, जबकि सीजेपी के समर्थकों का कहना है कि यह राजनीतिक उत्पीड़न है। खबर का महत्व है क्योंकि यह दिखाता है कि राजनीतिक नेताओं पर भी पुलिस कार्रवाई कर सकती है, जिससे विरोध प्रद