अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत, प्रदर्शन पर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने
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अक्टूबर 18, नई दिल्ली: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को गिरफ्तार कर स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें सशर्त जमानत मिल गई। वहीं, इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
पीस बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से जुड़े मामले में अदालत ने दिपके को पीस बॉन्ड भरने की शर्त पर जमानत दी। दूसरी ओर, दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने प्रदर्शनकारियों को आम आदमी पार्टी और राहुल गांधी की ‘बी-टीम’ बताया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार का विरोध करने के नाम पर युवाओं को राजनीतिक टकराव में शामिल कर रही है और राहुल गांधी लोकतांत्रिक तथा न्यायिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों पर पलटवार किया है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ने राहुल गांधी के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि SIR का मुद्दा सबसे पहले कांग्रेस ने उठाया था।
DMK का कहना है कि उसने अन्य विपक्षी दलों से पहले ही इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी। पार्टी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने जुलाई 2025 में ही इस पर विरोध जताया था। उस समय बिहार में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की खबरें सामने आई थीं। इस बयान के बाद SIR को लेकर कांग्रेस और DMK के बीच मतभेद एक बार फिर उजागर हुए हैं।
फिलहाल, दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक दलों के बयानों को लेकर विवाद जारी है। बीजेपी और विपक्ष एक-दूसरे पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों का इस्तेमाल करने के आरोप लगा रहे हैं। SIR को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच असहमति बनी हुई है।
फ़ाइल फ़ोटो