'अगर फैसले...', फॉर्म-6 विवाद पर कार्ति चिदंबरम ने ज्ञानेश कुमार को घेरा
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश देने से इनकार के बाद कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने SIR फॉर्म 6 और फॉर्म 7 में बदलाव और चुनाव आयोग के फैसले लेने के तरीके को लेकर चिंता जताई.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया.
कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार और दूसरे चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी.
कार्ति चिदंबरम ने क्या कहा?
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी में गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग के फैसले संविधान और कानून के मुताबिक लिए जा रहे हैं या नहीं.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए जा रहे हैं या बहुमत के आधार पर.
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से अकेले लिए गए हैं तो उनकी वैधता पर सवाल उठता है. हालांकि, यह कार्ति चिदंबरम का राजनीतिक आरोप है.
सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि ज्ञानेश कुमार ने वास्तव में सभी संबंधित फैसले अकेले लिए थे. कोर्ट ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड और जवाब मांगा है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने तत्काल निलंबन की मांग स्वीकार नहीं की.
पीठ ने कहा कि वह केवल मीडिया रिपोर्टों या आरोपों के आधार पर अंतरिम आदेश नहीं दे सकती और पहले संबंधित पक्षों का जवाब लेना जरूरी है.
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर रिकॉर्ड की जांच के बाद यह सामने आता है कि चुनाव आयोग में फैसले तय कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ लिए गए थे, तो ऐसे फैसलों पर कार्रवाई की जा सकती है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है और उ
📡 स्रोत: ABP Live