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AK-47 से लैस पुलिस से आरोपी को छुड़ा ले गए:सीधी में ओडिशा की टीम पर हमला-फायरिंग; 3 गाड़ियों में आए थे बदमाश

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 👁️ 7 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
AK-47 से लैस पुलिस से आरोपी को छुड़ा ले गए:सीधी में ओडिशा की टीम पर हमला-फायरिंग; 3 गाड़ियों में आए थे बदमाश

सीधी जिले में अज्ञात बदमाशों ने ओडिशा पुलिस की टीम पर हमला कर दिया। 3 गाड़ियों में पहुंचे बदमाशों ने पुलिस की गाड़ी को घेरकर तीन बार गोलियां चलाईं। बेसबॉल बैट से तोड़फोड़ की, फिर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के आरोपी को छुड़ा ले गए। वारदात रीवा-सीधी सीमा पर छुहिया घाटी में मंगलवार दोपहर करीब 11.30 बजे की है।

ओडिशा पुलिस की गाड़ी के कांच टूट गए। एक टायर में गोली भी लगी है। हालांकि, किसी पुलिसकर्मी के घायल होने की जानकारी नहीं है। बदमाश मैहर की तरफ भागे थे। टीम में 8 पुलिसकर्मी थे, जिनके पास AK-47, पिस्टल समेत अन्य हथियार थे। देखिए, 5 तस्वीरें… दो गाड़ियों ने आगे, एक ने पीछे से रास्ता रोका सीधी एसपी संतोष कोरी ने कहा- ओडिशा पुलिस की टीम NDPS एक्ट में गिरफ्तार आदित्य मिश्रा को रीवा कोर्ट में पेश करने जा रही थी।

सीधी से गुजरते वक्त छुहिया घाटी में दो गाड़ियों ने आगे की तरफ से जबकि एक गाड़ी ने पीछे की तरफ से उनका रास्ता रोक लिया। गाड़ियों से बदमाश उतरे और आदित्य को छुड़ाकर भाग गए। ओडिशा पुलिस ने डायल 112 को फोन लगाया। पुलिसकर्मियों की आंखों में डाला मिर्च स्प्रे ओडिशा पुलिस टीम के सदस्य ईश्वर सिंह ने कहा- बदमाशों ने हमारी आंखों में मिर्च स्प्रे डाल दिया।

इसके बाद कई गोलियां चलाईं। हम कुछ समझ पाते, उससे पहले ही वे भाग गए। ये खबर भी पढ़ें… एमपी में क्यों पिट रही पुलिस, 5 वजह मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों पर लगातार हो रहे हमलों से पुलिस और जनता के रिश्तों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक महीने में ही प्रदेश में पुलिस पर हमले की 6 घटनाएं हो चुकी हैं।

इनमें एक एएसआई की मौत हो चुकी है जबकि 8 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस मुख्यालय के अधिकारी भी इससे हैरान हैं। पढ़ें पूरी खबर…

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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🎙️ जनता का संदेश का मत

सीधी जिले में हुए इस भयावह हमले से हमें यह सिखने को मिलता है कि हिंसा कभी समाधान नहीं देती। जब भी किसी विवाद या नाराज़गी का सामना हो, शांतिपूर्ण संवाद, कानूनी मार्ग और सामुदायिक समर्थन सबसे बेहतर विकल्प हैं। पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास और सहयोग से ऐसी घटनाएँ रोकी जा सकती हैं। हम सभी को मिलकर सहानुभूति, सहिष्णुता और न्याय की भावना को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि समाज में शांति और सुरक्षा बनी रहे।

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