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अलवर में 375 साल पुराने करणी माता मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, नवरात्र मेले में उमड़ रहे श्रद्धालु

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
अलवर में 375 साल पुराने करणी माता मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, नवरात्र मेले में उमड़ रहे श्रद्धालु

अलवर शहर के समीप अरावली की वादियों में बाला किला के पास स्थित ऐतिहासिक करणी माता मंदिर में नवरात्र के अवसर पर नौ दिवसीय मेले का आगाज हो गया है। करीब 375 साल पुराने इस मंदिर में राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सरिस्का बाघ अभयारण्य के बफर जोन में स्थित मंदिर तक श्रद्धालुओं को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक प्रवेश दिया जा रहा है। वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त फॉरेस्ट गार्ड तैनात किए गए हैं, वहीं सड़क की स्थिति के कारण चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है।

अलवर,17 अक्टूबर। नवरात्र के पावन पर्व पर अलवर में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर अरावली की वादियों में बाला किला के पास स्थित ऐतिहासिक करणी माता मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। करीब 375 साल पुराने इस मंदिर में नौ दिवसीय नवरात्र मेले की शुरुआत के साथ ही भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

कोई पैदल यात्रा कर दरबार में हाजिरी लगा रहा है, तो कोई परिवार के साथ माता का आशीर्वाद लेने पहुंच रहा है। खास बात यह है कि धार्मिक आस्था के इस केंद्र में सभी धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित करणी माता मंदिर अलवर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मान्यता है कि 17वीं शताब्दी में अलवर के तत्कालीन महाराज राजा राव बख्तावर सिंह ने माता भवानी के स्वरूप में करणी माता के इस मंदिर का निर्माण करवाया था। तभी से यहां नवरात्र के अवसर पर मेले की परंपरा चली आ रही है। मेले के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। राजस्थान के अलावा हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालु माता के दरबार में सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और संतान सुख की कामना कर रहे हैं।मंदिर के महंत उमेश शर्मा के अनुसार, मंदिर की स्थापना के पीछे राजा बख्तावर सिंह से जुड़ी एक धार्मिक मान्यता प्रचलित है। बताया जाता है कि राजा लंबे समय से पेट दर्द की समस्या से परेशान थे। कई चिकित्सकों से उपचार कराने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली।

इसके बाद उन्हें स्वप्न में माता भवानी के दर्शन हुए और एक सफेद चील दिखाई दी। मान्यता के अनुसार, चील जिस स्थान पर पहुंची, वहीं राजा ने माता की पूजा-अर्चना की और मंदिर की स्थापना करवाई। तभी से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भक्तों का विश्वास है कि माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है।

यही वजह है कि नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजन के साथ मेले में ग्रामीण संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है। दूर-दराज से आए व्यापारी अपनी दुकानें सजा रहे हैं। पारंपरिक वस्त्र, खिलौने, मिठाइयां और झूले बच्चों सहित युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।

मंदिर परिसर और मेले के आसपास श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी हुई है। दूसरी ओर, मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते और वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। सरिस्का प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। सड़क की स्थिति के कारण चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है, जिससे श्रद्धालुओं को पैदल या अन्य अनुमत साधनों से मंदिर तक पहुंचना पड़ रहा है।

वीओ: करणी माता मंदिर सरिस्का बाघ अभयारण्य के बफर जोन में आने वाले बाला किला वन क्षेत्र के पास स्थित है। वर्तमान में इस क्षेत्र में बाघिन एसटी-2302 अपने शावकों के साथ विचरण कर रही है। वन्यजीवों की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त फॉरेस्ट गार्ड तैनात किए गए हैं, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

आस्था, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य के संगम के रूप में पहचान रखने वाला अलवर का करणी माता मंदिर नवरात्र के दौरान भक्तिमय माहौल में सराबोर है। नौ दिनों तक चलने वाले इस मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने की उम्मीद है। प्रशासन और वन विभाग की निगरानी के बीच भक्त माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

बाइट-1: उमेश शर्मा, पुजारी, करणी माता मंदिर

बाइट-2: मोहित घई, श्रद्धालु बाइट-3: भारती गुप्ता, महिला श्रद्धालु

बाइट-4: राकेश गुप्ता, श्रद्धालु बाइट-5: विजय सैनी, श्रद्धालु

बाइट-6: शंकर सिंह शेखावत, रेंजर, सरिस्का

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।