अमेरिका से भारत को बड़ी राहत, ट्रंप ने रूसी तेल और गैस खरीद पर लगे प्रतिबंधों को हटाया
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
US Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस की खरीद को लेकर प्रतिबंधों में राहत देने का फैसला किया है.
इस कदम से भारत, चीन समेत उन देशों को फायदा हो सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार शाम (स्थानीय समय) राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए 'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून' के तहत यह छूट दी.
खास बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय में आया, जब अमेरिका द्वारा लगाए गए ये प्रतिबंध लागू होने वाले थे.
अपने कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इस फैसले के समर्थन में अमेरिकी कांग्रेस को एक प्रमाण-पत्र सौंपा है.
इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिबंधों से छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है.
बता दें कि ट्रंप के इस फैसले से रूसी तेल और गैस की खरीद पर निर्भर देशों को राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इसका वास्तविक असर छूट की शर्तों और उसके दायरे पर निर्भर करेगा.
दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे के नाम पर रखा गया था बिल का नाम दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर प्रस्तावित ‘लिंडसे ओ.
ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के खिलाफ सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार दिया गया था.
इसके अलावा, रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी इसमें शामिल था. बता दें कि लिंडसे ग्राहम का निधन इसी साल जुलाई में हुआ था. वह यूक्रेन के प्रमुख समर्थकों में गिने जाते थे.
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ग्राहम लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि रूस को आर्थिक मदद देने वाले देशों के खिलाफ भी कड़े कदम उठाए जाने चाहिए.
रुस से तेल खरीदने पर ट्रंप ने की थी भारत की आलोचना बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने की आलोचना भी की थी. उन्होंने कहा था कि भारत को ऐसा करना बंद कर देना चाहिए.
हालांकि, भारत इस मामले पर अडिग रहा और उसने साफ कहा कि वह अपने आर्थिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा.
हालांकि ट्रंप का प्रतिबंधों में ढील देना, हाल ही में लिए गए उनके फैसलों में एक और बड़ा बदलाव (यू-टर्न) है.
कुछ दिन पहले, उन्होंने रूस के साथ तेल का एक समझौता किया था, जिसके तहत मॉस्को "अमेरिकी और वैश्विक बाजार" को 300,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा.
ट्रंप ने यह भी कहा था कि इसके अलावा, रूस नवंबर में 500,000 टन डीजल की आपूर्ति करेगा, और उसके तुरंत बाद 1 मिलियन टन डीजल और देगा.
अमेरिका-रूस तेल सौदे को लेकर ट्रंप और जेलेंस्की आमने-सामने ट्रंप के इस फैसले को मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका में तेल संकट को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया.
हालांकि, कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की, जिनमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी शामिल थे.
उन्होंने इस कदम को "युद्ध में निवेश" बताया और रूस के साथ "वास्तविक तनाव-कमी" की वकालत की. हालांकि, ट्रंप अपने फैसले पर अडिग रहे.
उन्होंने यहां तक कह दिया कि यूक्रेन को एक नए राष्ट्रपति की जरूरत है, जो यह दर्शाता है कि मॉस्को के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर वाशिंगटन और कीव के बीच मतभेद काफी बढ़ गए हैं.
ट्रंप ने जेलेंस्की से रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना बंद करने को कहा है, बावजूद इसके हमले जारी हैं, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति नाराज हैं.
📡 स्रोत: NewsData.io