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अमेरिका को ईरान का दो टूक जवाब, 7 शर्तें माने बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
अमेरिका को ईरान का दो टूक जवाब, 7 शर्तें माने बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बावजूद शांति वार्ता को लेकर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है.

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के दबाव में ईरान कोई फैसला नहीं लेगा.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है, जब तेहरान की ओर से रखी गई सात शर्तों को स्वीकार किया जाएगा.

गालिबफ ने अमेरिका की नीति को 'गाजर और डंडे' वाला रवैया बताते हुए कहा कि इससे ईरान पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

ईरान की सात शर्तों पर टिकी शांति वार्ता मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान की शर्तों के बारे में मध्यस्थों को कई बार स्पष्ट जानकारी दी जा चुकी है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से दबाव और रियायतों का एक साथ इस्तेमाल करने की रणनीति काम नहीं करेगी.

गालिबफ के मुताबिक, शांति वार्ता में आगे बढ़ने का रास्ता तभी खुलेगा, जब ईरान की सात शर्तों पर सहमति बनेगी.

उनका यह बयान उन खबरों के बीच आया है, जिनमें दावा किया गया था कि मध्यस्थों ने तेहरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायतें नहीं दीं तो अमेरिका दोबारा हवाई हमले कर सकता है.

रिपोर्टों के मुताबिक, इसके बदले अमेरिका कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और ईरान पर लगी समुद्री नाकाबंदी खत्म करने के विकल्प पर विचार कर सकता है.

जेडी वेंस ने ईरान को भेजा पत्र, अभी जवाब नहीं इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिशें भी जारी हैं.

ईरानी समाचार एजेंसियों तस्नीम और फार्स ने गुरुवार को बताया कि ईरान को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से एक पत्र मिला है. हालांकि, तेहरान ने अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है.

तस्नीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ईरान को पत्र मिल चुका है, लेकिन उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. फार्स ने भी मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से इसी तरह की खबर दी.

इससे पहले 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर जेडी वेंस ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को पत्र भेजा था.

इसका मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता फिर से खोलना और अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई को रोकना था.

रिपोर्ट के अनुसार, पत्र और उसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में किसी अंतिम शांति समझौते की शर्तें तय करने के बजाय बातचीत के लिए एक संभावित ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया. 28 फरवरी से जारी है अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद 28 फरवरी से ईरान के साथ युद्ध शुरू हुआ था.

इस संघर्ष में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए थे. इसके बाद से पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है.

दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री रास्तों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं.

होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों में आग लगने का दावा इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बढ़ गया है.

ईरानी सेना ने दावा किया है कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश के दौरान समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आने से कम से कम तीन तेल टैंकरों में आग लग गई.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में तीन टैंकरों में धमाके हुए और आग लग गई.

संगठन का दावा है कि ये जहाज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए निर्धारित रास्ते के बजाय एक प्रतिबंधित दक्षिणी मार्ग का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे थे.

IRGC ने आरोप लगाया कि इन जहाजों ने अपने रडार और नेविगेशन सिस्टम बंद कर रखे थे. साथ ही ईरानी नौसेना की चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया था.

ईरान का यह दावा अमेरिकी सेना की उस घोषणा के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के मुख्य समुद्री रास्तों को साफ कर दिया गया है.

इस घटनाक्रम के बाद दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

📡 स्रोत: NewsData.io

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