अमृत ग्रुप पर ED का एक्शन, 20 ठिकानों पर रेड, 2.75 करोड़ की संपत्ति जब्त
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोलकाता जोनल कार्यालय-I ने अमृत ग्रुप ऑफ कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत 16 और 17 सितंबर को कोलकाता, इंदौर और जयपुर में 20 आवासीय और कार्यालय परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया.
ये ठिकाने ग्रुप की कंपनियों, निदेशकों, प्रमोटरों और उनसे जुड़े अन्य लोगों से संबंधित हैं. इस मामले में कार्रवाई पीएमएलए की धारा 17 के तहत की गई.
ईडी के अनुसार, जांच सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) की ओर से 1 अगस्त, 2025 को दर्ज आपराधिक शिकायत के आधार पर शुरू हुई.
शिकायत अमृत प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, अमृत बायो-एनर्जी एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, अमृत प्रोजेक्ट्स (एन.ई.) लिमिटेड, अमृत बाजार परिसेवा लिमिटेड और इनके निदेशकों और प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज की गई थी.
131.86 करोड़ रुपये जुटाने का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि कैलाश चंद दुजारी, काली किशोर बागची, अमृत दुजारी और अन्य लोगों ने अपनी कंपनियों के जरिए आम लोगों से करीब 131.86 करोड़ रुपये जुटाए.
रकम फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD), मासिक/त्रैमासिक आय योजना और क्लब सदस्यता योजनाओं के जरिए ली गई.
ईडी के मुताबिक, इन योजनाओं को रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर, डीप डिस्काउंट बॉन्ड और हर्ब स्कीम में निवेश के रूप में पेश किया गया, जबकि निवेशकों को उनकी रकम पर निश्चित रिटर्न का भरोसा दिया गया.
आरोप है कि बाद में जमा रकम लौटाई नहीं गई.
वित्त वर्ष 2019-20 तक करीब 71.04 करोड़ रुपये जमाकर्ताओं को वापस नहीं किए गए थे.
शेल कंपनियों में फंड डायवर्ट करने का आरोप
ईडी की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि अमृत ग्रुप की कंपनियों के निदेशक और कर्मचारी आम लोगों से ज
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
अमृत ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह में 20 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह विषय बड़े कॉर्पोरेट समूहों के वित्तीय कदाचार पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें 2.75 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त हुई और 16-17 सितंबर को कोलकाता, इंदौर, जयपुर के प्रमुख शहरों में कार्रवाई हुई। यह दिखाता है कि सरकार कॉर्पोरेट धोखाधड़ी पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। आम जनता पर इसका असर भरोसे को बढ़ा सकता है, निवेशकों को चेतावनी देता है और वित्तीय पारदर्शिता के लिए जागरूकता बढ़ाता है।