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अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस: भारत में 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस: भारत में 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर

अक्टूबर 17, नई दिल्ली: हर साल 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया से गरीबी खत्म करने के लिए जागरूकता बढ़ाना और मानवाधिकारों व मानवीय गरिमा की रक्षा पर जोर देना है। भारत में भी पिछले करीब एक दशक में गरीबी कम करने के लिए कई योजनाएं चलाई गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2013-14 से 2022-23 के बीच देश में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले।

गरीबी के खिलाफ वैश्विक प्रयासगरीबी केवल पैसों की कमी तक सीमित नहीं है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और जीवन स्तर पर भी पड़ता है। इसी मुद्दे को उठाने के लिए 1987 में पेरिस में एक लाख से अधिक लोग जुटे थे। उन्होंने 1948 में अपनाई गई मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा को याद करते हुए गरीबी को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और इसे खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।

इसके बाद, 22 दिसंबर 1992 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव अपनाया। इस दिन का उद्देश्य गरीबी से प्रभावित लोगों की समस्याओं पर ध्यान दिलाना और उनके अधिकारों तथा सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने के लिए प्रयासों को बढ़ावा देना है।

2026 की थीम में सुरक्षित आवास पर जोरवर्ष 2026 से 2028 के लिए इस दिवस की थीम ‘शांति और मानवाधिकारों के लिए एकजुटता’ रखी गई है। वहीं, 2026 का विशेष विषय ‘सभी के लिए सुरक्षित आवास’ है। इसके जरिए इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि सुरक्षित और पर्याप्त आवास हर व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन और समाज में भागीदारी के लिए जरूरी है।

दुनियाभर में 2 अरब 80 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में अपर्याप्त आवास की समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे में आवास नीतियों में लोगों की जरूरतों, मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई गई है। साथ ही, गरीबी का सामना कर रहे लोगों को नीति निर्माण में शामिल करने और सभी के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के संसाधन जुटाने पर भी जोर दिया गया है।

गरीबी मापने के अलग-अलग पैमानेगरीबी का आकलन करने के लिए अलग-अलग देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अपने मानक हैं। विश्व बैंक अत्यधिक गरीबी को मापने के लिए अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा का इस्तेमाल करता है। वहीं, भारत में नीति आयोग का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े कई संकेतकों के आधार पर लोगों की स्थिति का आकलन करता है।

भारत में बहुआयामी गरीबी में गिरावटआंकड़ों के मुताबिक, भारत में बहुआयामी गरीबी का स्तर 2013-14 में 29.17 प्रतिशत था, जो 2022-23 में घटकर 11.28 प्रतिशत रह गया। इस अवधि में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले।

देश में वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सुरक्षा, आवास और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के जरिए जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाएं इसी दिशा में चलाई जा रही हैं।

इन योजनाओं के जरिए भोजन, आवास, स्वास्थ्य, स्वच्छ ईंधन, पेयजल और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर जोर दिया गया है। गरीबी उन्मूलन के प्रयासों में इन सुविधाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना अहम माना जाता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।