अनुचर के जेल जाने के 14 दिन बाद निलंबन:9 महीने तक दबा रहा मामला, डीआईओएस ने प्रधानाचार्य से मांगा जवाब और पत्रावली
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बस्ती के खैर इंडस्ट्रीयल इंटर कॉलेज में एक अनुचर के निलंबन और सेवा खत्म करने की कार्रवाई पर सवाल उठ गए हैं। अनुचर के जेल जाने के 14 दिन बाद प्रधानाचार्य ने उसे निलंबित कर दिया था, लेकिन इस मामले को करीब नौ महीने तक विभाग से छिपाए रखा गया। अब निलंबन के अनुमोदन के लिए पत्र भेजे जाने के बाद यह मामला जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय के सामने आया है।
डीआईओएस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कॉलेज के प्रधानाचार्य से छह बिंदुओं पर 22 अगस्त को जवाब मांगा है। साथ ही कार्रवाई से जुड़ी पूरी पत्रावली भी देने के निर्देश दिए हैं। डीआईओएस ने चेतावनी दी है कि अगर समय पर जवाब नहीं दिया गया, तो इसे अनुशासनहीनता मानकर कार्रवाई की जाएगी।
विभागीय पत्र के मुताबिक, मो.
सलीम खैर इंडस्ट्रीयल इंटर कॉलेज में अनुचर के पद पर काम करते थे। अक्टूबर 2025 में उनके जेल जाने के लगभग 14 दिन बाद प्रधानाचार्य ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद निलंबन की मंजूरी लेने के बजाय इस मामले को लटकाए रखा गया। 22 जुलाई 2026 को प्रधानाचार्य ने निलंबन के अनुमोदन के लिए डीआईओएस कार्यालय को पत्र भेजा।
आरोप है कि निलंबन के कारण और उससे जुड़े जरूरी तथ्यों का भी पत्र में साफ तौर पर जिक्र नहीं किया गया था। 29 जुलाई 2026 को भेजे गए एक और पत्र में बताया गया कि अनुचर के सजायाफ्ता होने के कारण उसकी सेवा खत्म कर दी गई है। हालांकि, इसमें सेवा खत्म करने की तारीख नहीं बताई गई थी। डीआईओएस ने इस पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने प्रधानाचार्य से कार्रवाई में देरी, तथ्यों को साफ न करने और पत्रावली न देने समेत छह बिंदुओं पर जवाब मांगा है। अब प्रधानाचार्य के जवाब के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ जनता का संदेश का मत
सभी शिक्षा संस्थानों को पारदर्शिता और न्याय का पालन करना चाहिए। जब किसी अनुचर के निलंबन में देरी और छिपाव हो, तो वह न केवल उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि पूरे शैक्षणिक समुदाय के विश्वास को भी तोड़ता है। हमें ऐसे मामलों में त्वरित और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने की प्रेरणा देनी चाहिए, ताकि न्याय की राह खुली रहे और हर छात्र-शिक्षक के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो सके।