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बचपन में हुआ पोलियो; बुआ ने गोद लिया:बिहार के प्रमोद भारतीय दल के फ्लैग बीयरर बने, एशियन पैरा गेम्स उद्घाटन में थामेंगे तिरंगा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
बचपन में हुआ पोलियो; बुआ ने गोद लिया:बिहार के प्रमोद भारतीय दल के फ्लैग बीयरर बने, एशियन पैरा गेम्स उद्घाटन में थामेंगे तिरंगा

बिहार के लिए गर्व पल है। वैशाली की धरती से निकलकर देश का नाम दुनिया में रोशन करने वाले पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत को भारतीय दल के फ्लैग बीयरर की जिम्मेदारी मिली है। प्रमोद भगत के साथ पैरा-टेबल टेनिस स्टार भाविना पटेल भी एशियन पैरा गेम्स के उद्घाटन समारोह में तिरंगा थामेंगी। दोनों 18 अक्टूबर को जापान के नागोया में होने वाले उद्घाटन समारोह में भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे।

आइची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स का आयोजन जापान में 18 से 24 अक्टूबर तक होगा। उद्घाटन समारोह में प्रमोद भगत और भाविना पटेल तिरंगा लेकर भारतीय दल के आगे चलेंगे। उनके चयन को भारतीय पैरा खेलों में हासिल उपलब्धियों और दोनों खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय पहचान के सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।

वैशाली से दुनिया के मंच तक पहुंचा प्रमोद का सफर प्रमोद भगत बिहार के वैशाली से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर पैरा-बैडमिंटन में भारत को कई बड़ी उपलब्धियां दिलाई हैं। वह टोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हैं और एशियन पैरा गेम्स में भी उनका शानदार रिकॉर्ड रहा है।

प्रमोद ने 2014 से 2023 के बीच एशियन पैरा गेम्स में कुल छह पदक जीते हैं। इनमें दो स्वर्ण और चार कांस्य पदक शामिल हैं। अब तिरंगे के साथ भारतीय दल की अगुवाई करने का अवसर उनके खेल करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। हाल में जीता छठा विश्व खिताब प्रमोद भगत ने हाल ही में पैरा-बैडमिंटन में अपना छठा विश्व खिताब जीतकर एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित की।

उन्होंने पुरुषों की एसएल-3 श्रेणी में इंडोनेशिया के मुहम्मद अल इमरान को हराकर खिताब अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ वह विश्व चैंपियनशिप में इस वर्ग के सबसे ज्यादा एकल खिताब जीतने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो गए। प्रमोद को 4 साल की उम्र में मारा था पोलियो, बुआ ने लिया गोद कई बार विश्व को अपने खेल से चौंका चुके प्रमोद भगत एक बार फिर बैडमिंटन कोर्ट में उतरेंगे।

हाजीपुर में जन्में प्रमोद को 4 साल की उम्र में पोलियो हो गया था। उनका बायां पैर खराब हो गया था। पिता की बहन किशुनी देवी की खुद की कोई संतान नहीं थी। ऐसे में बुआ ने अपने भतीजे प्रमोद को गोद ले लिया और अपने साथ भुवनेश्वर ले आई। यहीं प्रमोद पढ़ाई करने लगे। रात में चोरी-छूपे बैडमिंटन की करते थे प्रैक्टिस प्रमोद को बचपन से ही बैडमिंटन का काफी शौक था।

पैसे की कमी के कारण एक शटल खरीदकर, कई महीनों तक उसी से खेलते थे। गांव से थोड़ा दूर स्थित पेलेयर क्लब में प्रमोद ने बैडमिंटन खेलना शुरू किया। हालांकि, उनके पिता को खेल पसंद नहीं था और वह प्रमोद को पढ़ाई में ध्यान देने को कहते थे। इसलिए प्रमोद दिन में पढ़ाई करते थे और रात में चोरी-छूपे बैडमिंटन खेल का अभ्यास करते थे।

पिता की मौत के बाद इलेक्ट्रिक दुकान खोली इसी बीच प्रमोद के पिता का देहांत हो गया और परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। उनके पिता एक ड्राइवर थे। कुछ दिन बाद प्रमोद ने अपने भाइयों के साथ मिलकर गाड़ी को बेच दिया और गांव के पास ही एक इलेक्ट्रिक दुकान खोल दिया। दुकान पर सभी भाई बारी-बारी से बैठने लगे।

आर्थिक स्थिति में जब कुछ सुधार हुई तो प्रमोद ने दोबारा खेल जारी किया। प्रमोद ने 15 वर्ष की आयु में अपना पहला टूर्नामेंट खेला। दर्शकों के प्रोत्साहन से उन्हें अपने बैडमिंटन करियर में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। वर्ष 2024 में डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन से संबंधित मामले में उन पर 18 महीने का प्रतिबंध लगाया गया था।

📡 स्रोत: NewsData.io

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