बच्चे के प्राइवेट पार्ट को चूमना, 'पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट', केरल HC का फैसला
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चेतावनी: (इस खबर को पढ़ने से पहले हम चेतावनी देते हैं कि इसमें बच्चों के यौन शोषण का जिक्र है.
केरल हाईकोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत 61 साल के व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा है.)
केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि बच्चे के प्राइवेट पार्ट्स को चूमना POCSO एक्ट के तहत पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट माना जाएगा.
हाईकोर्ट के जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने दोषी की अपील खारिज कर दी है.
साथ ही ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें 20 साल की सजा सुनाई गई थी.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 1 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया कि जब यौन इरादे से मुंह से प्राइवेट पार्ट को छुआ जाता है, तो इस हरकत को POCSO एक्ट की धारा 3(D) के तहत पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट माना जाएगा.
यह धारा 4 के दंड के योग्य है.
इसलिए इस केस में स्पेशल जज का यह निष्कर्ष सही है कि आरोपी ने इस एक्ट की धारा 5(1) और 6 के तहत क्राइम किया है.
नाबालिग को शराब और गांजे की बीड़ी देकर उसका यौन शोषण किया गया
प्रोसिक्यूटर्स की तरफ से आरोप था कि आरोपी ने 14 साल के लड़के को शराब और गांजे की बीड़ी दी और फिर दो बार उसके साथ गंभीर यौन अपराध को अंजाम दिया.
आरोपी नाबालिग लड़के को एक दुकान के अंदर ले गया था, उसके कपड़े उतारे और उसका यौन शोषण किया.
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को POCSO एक्ट की धारा 6 (सीरियस पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट क्राइम) के साथ धारा 5(1) और धारा 10 के साथ धारा 9(1) और साथ ही जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 77 के तहत दोषी माना है.
उसे 20 साल की सजा सुनाई गई.
आरोपी के वकील ने दलील देते हुए कहा है कि उसे बिना किसी वजह से इस मामले में फंसाया गया है. उसकी उम्र को देखते हुए नरमी बरती जाए.
दूसरी और प्रोसेक्यूटर्स पक्ष का कहना है कि पीड़ित के बया
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
किशोरों के निजी अंगों को चूमना, पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट के रूप में POCSO एक्ट के तहत माना गया है, जिसे केरल हाईकोर्ट ने 61 वर्षीय दोषी पर बरकरार रखा। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि मामूली छूने से भी बाल शोषण के दायरे में गिना जा सकता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न्यायपालिका की स्पष्ट रुख को दर्शाती है और कानून को मजबूत बनाती है। आम जनता पर इसका असर यह है कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के साथ शारीरिक संपर्क के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी, और समाज में बाल संरक्षण के प्रति जा