राजनीति

बदलते भू-राजनीतिक, तकनीकी और आर्थिक माहौल के अनुरूप नियामक व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरी: राजीव गौबा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
बदलते भू-राजनीतिक, तकनीकी और आर्थिक माहौल के अनुरूप नियामक व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरी: राजीव गौबा

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने तेजी से बदलते भू-राजनीतिक, तकनीकी और आर्थिक माहौल के अनुरूप नियामक व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि नीति-निर्माताओं के सामने चुनौती नियमन और आर्थिक विकास में से किसी एक को चुनने की नहीं है, बल्कि ऐसे नियम विकसित करने की है, जो जोखिमों का प्रबंधन करने के साथ-साथ नवाचार, प्रतिस्पर्धा और निवेश को बढ़ावा दे।

श्री गौबा ने यह बात कल नई दिल्ली में पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के दौरान ‘विघटन के दौर में नियामक निगरानी’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि नियम बनाते समय संतुलित और जरूरत के मुताबिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। श्री गौबा ने अलग-अलग नियामक संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे एक ही काम के लिए बार-बार नियम बनने से बचा जा सकेगा और नियमों में मौजूद कमियों को दूर किया जा सकेगा।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह विषय नियामक व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता पर है, जो भू-राजनीतिक, तकनीकी और आर्थिक परिवर्तनों के अनुरूप हो। राजीव गौबा का तर्क है कि नियमों को जोखिम प्रबंधन के साथ-साथ नवाचार, प्रतिस्पर्धा और निवेश को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया जाना चाहिए। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि नीति-निर्माता अब यह तय कर रहे हैं कि किस दिशा में नियमन को ढालें, जिससे आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नई नीतियाँ निवेश को प्रोत्साहित करेंगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक स्थिरता म

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।