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बड़वानी में नर्मदा कुंड में गणेश विसर्जन, 2000 से अधिक प्रतिमाओं को दी गई विदाई

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
बड़वानी में नर्मदा कुंड में गणेश विसर्जन, 2000 से अधिक प्रतिमाओं को दी गई विदाई

बड़वानी में अनंत चतुर्दशी पर गणपति बप्पा को भावभीनी विदाई दी गई। गणेश महोत्सव के समापन पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु गणेश प्रतिमाएं लेकर राजघाट रोड स्थित पुराने फिल्टर प्लांट परिसर में बनाए गए नर्मदा कुंड पहुंचे। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पिछले कई वर्षों से गणेश प्रतिमाओं का सीधे नर्मदा नदी में विसर्जन करने के बजाय कृत्रिम कुंड में विसर्जन कराया जा रहा है।

श्रद्धालुओं ने ढोल-ताशों के साथ शोभायात्रा निकाली और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के बीच विधि-विधान से प्रतिमाओं का विसर्जन किया। इस साल शहर के घरों और दुकानों में स्थापित 2000 से अधिक प्रतिमाओं और 71 छोटे-बड़े पंडालों में विराजित गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। 11 दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर आने की कामना के साथ बप्पा को विदाई दी।

विसर्जन स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। प्रवेश द्वार और कुंड के पास पुलिस बल तथा प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती रही। नगर पालिका की ओर से जलकुंड में विसर्जन की व्यवस्था की गई थी। विसर्जन के बाद शुक्रवार रात बड़वानी में 40 झांकियों का भव्य कारवां भी निकलेगा। रात 9 बजे तिरछी पुलिया से शुरू होकर झंडा चौक तक पहुंचने वाली झांकियों में पृथ्वीराज चौहान का पराक्रम, समुद्र मंथन, मोहिनी अवतार और शिव बारात जैसे ऐतिहासिक एवं पौराणिक प्रसंग आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

झांकी चल समारोह की सुरक्षा में 200 जवानों के साथ ड्रोन से निगरानी की जाएगी। अनंत चतुर्दशी का यह आयोजन बड़वानी जिले के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है।

बाइट-01: सोनाली शर्मा, सीएमओ, नगर पालिका बड़वानी

बाइट-02: लक्ष्मण पंवार, श्रद्धालु

🎙️ जनता का संदेश का मत

गणेश विसर्जन के दौरान नर्मदा कुंड की रक्षा के लिये हमने परंपरा को पर्यावरण के साथ समन्वयित किया है। यह उदाहरण दिखाता है कि सांस्कृतिक अनुष्ठान को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाकर हम समाज में सामंजस्य और जिम्मेदारी का संदेश फैला सकते हैं। जब भी कोई परंपरा पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है, तो हमें वैकल्पिक उपाय ढूँढकर उसे अपनाना चाहिए, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति दोनों सुरक्षित रहें।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।