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'बाढ़ ने छीना आशियाना, नवरात्र में बेटी भूखी':मुंगेर में बाढ़ पीड़ितों की फीकी दुर्गा पूजा, राहत राशि का इंतजार करता परिवार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
'बाढ़ ने छीना आशियाना, नवरात्र में बेटी भूखी':मुंगेर में बाढ़ पीड़ितों की फीकी दुर्गा पूजा, राहत राशि का इंतजार करता परिवार

"मेरी बेटी नवरात्रि का व्रत कर रही है। 9 दिनों तक वो सहेगी, लेकिन मेरे पास फल खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। हमलोगों का घर बाढ़ में गिर गया है। पूरा जमीन कीचड़ बन चुका है। मरम्मत के लिए पैसे नहीं हैं और सरकार की ओर से मिलने वाली 7 हजार रुपए की सहायता राशि भी अब तक नहीं मिली है। " ये कहना है मुंगेर में रहने वाली बबीता और पूनम देवी का, जो बाढ़ खत्म होने के एक महीने बाद भी अपने घर लौट नहीं पाई है।

दरअसल, मुंगेर में साल 2026 में अगस्त-सितंबर में दो बार बाढ़ आया। सितंबर के पहले सप्ताह में जिले में बाढ़ सबसे गंभीर दौर में थी। 7 सितंबर की रिपोर्ट में खतरे के निशान से 74 सेंटीमीटर ऊपर बताया गया है। यानी की गंगा 40.07 मीटर तक पहुंच गया था। इस दौरान करीब 38 पंचायतों में करीब 3.75 लाख लोग प्रभावित थे।

घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… पूजा की खुशियों पर भारी टूटा आशियाना पूरे भारत में नवरात्र चल रहा है। शहर से लेकर गांवों तक मां दुर्गा की आराधना हो रही है। बाजारों में चहल-पहल है और घरों में पूजा की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन मुंगेर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवारों के लिए इस बार दुर्गा पूजा की खुशियां अधूरी हैं।

गंगा की बाढ़ ने उनके घर उजाड़ दिए, घरेलू सामान बर्बाद कर दिया। रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। अब पानी उतरने के बाद ये परिवार अपने आशियानों को फिर से खड़ा करने में जुटे हैं। किसी को टूटी दीवारों की मरम्मत करानी है, तो किसी को बच्चों के खाने का इंतजाम करना है। हवेली खड़गपुर प्रखंड की तेलियाडीह पंचायत के कृष्णानगर में कई कच्चे मकान ध्वस्त हो गए हैं।

घर लौटे लोग बांस, लकड़ियां और बचा हुआ सामान समेटकर किसी तरह रहने की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, आर्थिक स्थिति ऐसी है कि मरम्मत के लिए जरूरी सामान जुटाना भी मुश्किल हो रहा है। टूटे मकान को फिर से घर बनाना है पीड़ित महिला बबीता ने बताया, बाढ़ ने मेरे पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया।

मेरा घर-द्वार सब गिर गया। किसी तरह बाल-बच्चों को संभालकर रखे हैं। घर में जो सामान बचा था, उसे भी सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया था। अब पानी घटने के बाद लौटे हैं, तो सबसे बड़ी चिंता टूटे मकान को ठीक करने की है। घर में बची लकड़ियों और दूसरे सामान को समेटकर रखा जा रहा है, ताकि किसी तरह रहने की व्यवस्था हो सके।

हालांकि, मरम्मत के लिए पैसे नहीं हैं। बच्चों के खाने-पीने का इंतजाम भी करना है। ऐसे में दुर्गा पूजा की तैयारी करना संभव नहीं हो पा रहा है। हमलोग एक महीने से सड़क किनारे रह रहे हैं। अब त्योहार का समय आया है, तो घर लौट रहे हैं। मेरी बेटी हर साल फास्टिंग करती है। इस बार भी वो व्रत में है, लेकिन न हमलोग पूजा का सामान जोड़ पा रहे हैं।

न ही उसके खाने के लिए व्रत का सामान। धार्किम परंपरा पर आर्थिक तंगी भारी पड़ रही है। बेटी को भूखा देखकर दुख हो रहा है लेकिन उसके लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं। त्योहार में भी अब खुशी नजर नहीं आ पा रही है। '7 हजार रुपए मिलने की बात थी, अब तक नहीं मिले' पूनम देवी ने बताया, बाढ़ में हमारा घर गिर गया है।

परिवार किसी तरह बच्चों के साथ रह रहा है। मकान की मरम्मत करानी है, लेकिन इसके लिए पैसे नहीं हैं। सरकार की ओर से 7 हजार रुपए की सहायता राशि मिलने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक हमें यह रकम नहीं मिली है। घर टूटने के बाद से परिवार परेशान है। खाने-पीने का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में मकान को दोबारा बनाने के लिए पैसे कहां से आएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है।

इस बार दुर्गा पूजा को लेकर मन में पहले जैसी खुशी नहीं है। घर उजड़ गया है, रहने का ठिकाना ठीक नहीं है और आर्थिक स्थिति भी खराब है। ऐसे में मेला देखने या त्योहार मनाने के बारे में सोचना मुश्किल है। फिलहाल बच्चों को संभालना और परिवार का गुजारा करना ही प्राथमिकता है। प्रशासन से राहत-मकान क्षति के मुआवजे की उम्मीद बाढ़ प्रभावित परिवारों को अब राहत राशि और मकान क्षति के मुआवजे का इंतजार है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ परिवारों को सहायता नहीं मिली है। वहीं, जिनके घर ध्वस्त हो गए हैं, वे मरम्मत के लिए आर्थिक मदद चाहते हैं। प्रशासन के लिए जरूरी है कि प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। कितने घर क्षतिग्रस्त हुए, किन परिवारों को सहायता मिली और किनका भुगतान बाकी है, इसकी स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।

जिनके मकान रहने लायक नहीं बचे हैं, उनकी जरूरतों का अलग से आकलन भी जरूरी है। वार्ड पार्षद को खरी-खोटी सुना रहा पीड़ित परिवार हवेली खड़गपुर प्रखंड की तेलियाडीह पंचायत के वार्ड-7 के वार्ड सदस्य और कृष्णानगर गांव निवासी गोरेलाल यादव ने बताया, गांव के 68 बाढ़ प्रभावित परिवारों की लिस्ट तैयार कर प्रशासन को भेजी गई थी।

इनमें से अब तक केवल 43 परिवारों को ही बाढ़ राहत राशि मिली है, जबकि 25 परिवार अभी भी सहायता से वंचित हैं। इन परिवारों के घर बाढ़ में डूब गए थे, लेकिन अब तक किसी को भी मकान क्षति के मुआवजे का लाभ नहीं मिला है। गोरेलाल यादव के मुताबिक, राहत राशि नहीं मिलने से नाराज प्रभावित परिवार उनके घर आकर शिकायत करते हैं।

उन्हें खरी-खोटी सुनाते हैं। इस समस्या से हवेली खड़गपुर के सीओ को भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब जानकारी मिल रही है कि संबंधित विभाग का पोर्टल ही बंद हो गया है। ऐसे में राहत राशि और मकान क्षति के मुआवजे का इंतजार कर रहे परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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