बागवानी में श्रम और समय की बचत करेगी मोनोरेल, सफल होने पर अन्य क्लस्टरों में स्थापित होगी सुविधा: जगत सिंह नेगी
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बागवानी मंत्री ने पलोहटा-II क्लस्टर में 25 लाख की लागत से बनी मोनोरेल का किया लोकार्पण
अक्तूबर 22, मंडी (हिमाचल प्रदेश): राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज मंडी जिले के विकास खंड सुंदरनगर के अंतर्गत एचपी शिवा परियोजना के पलोहटा-II क्लस्टर में 25 लाख रुपये की लागत से स्थापित मोनोरेल का विधिवत उद्घाटन किया। जगत सिंह नेगी ने कहा कि बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है।
मोनोरेल के माध्यम से बागवानों को खाद, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री पौधों तक पहुंचाने के साथ-साथ फल तैयार होने पर उनकी ढुलाई में भी सुविधा मिलेगी। इससे श्रम और समय की बचत होगी तथा बागवानी कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जब वह पिछली बार इस क्लस्टर के दौरे पर आए थे, तब बागवानी कार्यों को आसान बनाने के उद्देश्य से यहां मोनोरेल स्थापित करने का विचार सामने आया था।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की एचपी शिवा परियोजना हिमाचल के निचले क्षेत्रों में बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की महत्वाकांक्षी योजना है जिस पर लगभग 1,100 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश के सात जिलों में करीब 6,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी गतिविधियों को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्राकृतिक आपदा के कारण परियोजना के कार्यों में कुछ विलंब हुआ है, लेकिन अब विभिन्न क्षेत्रों में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मंडी जिले में लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी विकास का कार्य पूरा करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। फरवरी माह तक निर्धारित क्षेत्र में पौधरोपण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।
बागवानी मंत्री ने बताया कि पलोहटा-II क्लस्टर में 28.44 हेक्टेयर क्षेत्र को जापानी फल (पर्सिमन) की फ्यूयू किस्म की व्यावसायिक खेती के लिए विकसित किया गया है। इस क्लस्टर में कुल 13,386 पौधे रोपित किए गए हैं, जिससे क्षेत्र के 85 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें 73 पुरुष और 12 महिला किसान शामिल हैं।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि विदेशों में बागवानी के क्षेत्र में इस प्रकार की तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। बागवानी विभाग की ओर से स्थापित यह मोनोरेल एक पायलट प्रोजेक्ट है। इसके परिणामों का आकलन किया जाएगा। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो भविष्य में प्रदेश के अन्य बागवानी क्लस्टरों में भी आवश्यकता के अनुसार इस तरह की सुविधा स्थापित की जाएगी।
मोनोरेल के माध्यम से खाद, उर्वरक तथा अन्य आवश्यक सामग्री को बाग के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना आसान होगा। इसके अतिरिक्त फल तैयार होने के बाद उन्हें ढुलाई के माध्यम से बाहर निकालने में भी सुविधा मिलेगी। इससे बागवानों को भारी सामान उठाकर ले जाने में लगने वाले श्रम और समय की बचत होगी।
उन्होंने कहा कि पलोहटा-II क्लस्टर में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास पर लगभग 1.65 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। इसमें परियोजना के तहत भूमि विकास पर लगभग 32 लाख रुपये, सौर ऊर्जा आधारित बाड़बंदी पर 46.55 लाख रुपये तथा ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित करने पर करीब 85.94 लाख रुपये खर्च शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त किसानों को बागवानी के लिए आवश्यक कृषि सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई है। क्लस्टर में 61 क्विंटल नीम खली पर 1,03,999 रुपये तथा मल्च शीट पर 14,46,432 रुपये खर्च किए गए हैं। पौधों की छंटाई के लिए आठ सेक्येटर भी उपलब्ध करवाए गए हैं, जिनकी लागत 24,000 रुपये है। जापानी फल की फ्यूयू किस्म के पौधों पर 20,59,544 रुपये खर्च किए गए हैं।
मनरेगा के अंतर्गत भी 5,32,180 रुपये व्यय किए गए हैं। इसके अलावा किसानों के लिए आवश्यक उर्वरकों की व्यवस्था भी की गई है। इससे पूर्व जिला समन्वयक एचपी शिवा एवं विषय विशेषज्ञ उद्यान राजेश शर्मा ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर पूर्व सीपीएस सोहन लाल ठाकुर, राज्य अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निगम के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल, हि.प्र.
जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष नरेश चौहान, हि.प्र. एससी सेल के उपाध्यक्ष ब्रह्म दास चौहान, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दीप शर्मा, पलोहटा-2 क्लस्टर के प्रधान मनीष शर्मा, निदेशक उद्यान सतीश शर्मा, अतिरिक्त निदेशक उद्यान विद्याप्रकाश बैंस, उपमंडलाधिकारी (ना.) सुन्दरनगर अमर नेगी, उप निदेशक मंडी संजय गुप्ता व बिलासपुर जगदीश वर्मा, डीएसपी भारत भूषण सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।