राजनीति

बागी सांसदों ने नोटिस का जवाब देने का मांगा समय, महुआ बोलीं - 'यह दिखाता है...'

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
बागी सांसदों ने नोटिस का जवाब देने का मांगा समय, महुआ बोलीं - 'यह दिखाता है...'

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बुधवार (2 सितंबर) को उन 20 बागी सांसदों पर निशाना साधा है, जिन्होंने सांसदी रद्द करने की याचिकाओं के संबंध में जारी नोटिसों का जवाब देने के लिए और समय मांगा है.

इस पर मोइत्रा ने कहा कि तय समय में जवाब न दे पाना यह दिखाता है कि वे जानते हैं कि उन्होंने गलती की है.

आरोप लगाया कि ये सांसद टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीते थे, लेकिन बाद में वे NCPI और बीजेपी के गठबंधन के साथ चले गए. उनके पास अपने खिलाफ लगे आरोपों का कोई ठोस जवाब नहीं है.

मोइत्रा ने कहा कि बागी सांसदों के इस रवैये ने उनकी राजनीतिक चालों को उजागर कर दिया है. उनके मुखौटे उतर गए हैं. उनकी बेशर्मी और विश्वासघात सबके सामने है.

टीएमसी सांसद का यह बयान तब सामने आया है, जब एक दिन पहले ही टीएमसी के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा था कि 20 बागी सांसदों ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं पर जारी नोटिसों का जवाब देने के लिए लोकसभा सचिवालय से तीन सप्ताह का समय मांगा है.

लोकसभा सचिवालय ने सात दिन में मांगा था जवाब

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मोइत्रा ने कहा, 'हमने भाजपा से गठबंधन करने वाले टीएमसी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की हैं.

लोकसभा सचिवालय ने पिछले सप्ताह उन्हें नोटिस भेजकर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा था. समय सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन वे जवाब नहीं दे पाए. अब उन्होंने दो-तीन सप्ताह का और समय मांगा है.'

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

संसद में 20 बागी सांसदों ने नोटिसों के जवाब में समय माँगा, जिसे टीएमसी के सांसद महुआ मोइत्रा ने आलोचना करते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि वे अपनी गलती स्वीकार नहीं कर रहे। यह विषय संसद की कार्यवाही और शिस्त पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि सांसदों की बागी प्रवृत्ति से विधान प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यदि इस मुद्दे का समाधान नहीं होता, तो जनता को नीति निर्माण में देरी, भ्रष्टाचार की बढ़ोतरी और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा का सामना करना पड़ सकता है।

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