बैंक भर्ती फर्जीवाड़ा-CBI का 6 राज्यों में छापा, 4 गिरफ्तार:5 साल पुराने रिकॉर्ड खंगाले, आंखों के स्कैन में 172 फर्जी अफसर मिले; सबकी नौकरी जाएगी
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CBI ने बैंक भर्ती में 5 साल के पुराने डेटा की जांच के जरिए नौकरी पाने वाले फर्जी अभ्यर्थियों का खुलासा किया है। परीक्षा के दौरान जुटाए गए आंखों के स्कैन (आइरिस) से फर्जीवाड़े के जरिए नौकरी पाने वाले 257 संदिग्ध उम्मीदवार मिले। इनमें 172 अलग-अलग बैंकों में नौकरी कर रहे थे। सीबीआई अब देशभर में अन्य फर्जी अफसरों की तलाश में जुटी है।
आईबीपीएस ने इन सभी कार्यरत लोगों के साथ-साथ अन्य संदिग्धों को भी आजीवन के लिए परीक्षा से डिबार कर दिया है। संबंधित बैंकों को उनके सर्विस रूल्स के तहत कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब इनकी नौकरी जाने के साथ गिरफ्तारी की भी तलवार लटक रही है। सीबीआई ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
जबकि, 135 लोगों को आरोपी बनाया है। इस संबंध में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में आरोपियों की धरपकड़ और कार्रवाई की गई है। मध्य प्रदेश में तो इस संबंध में जांच के बाद ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। ऐसे सामने आई थी गड़बड़ी अधिकारियों ने 8 अक्टूबर को बताया कि CBI की स्पेशल टास्क ब्रांच, मुंबई ने कई राज्यों में एक साथ छापे मारे।
यह कार्रवाई इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन (IBPS) की शिकायत पर दर्ज FIR के बाद की गई। आईबीपीएस बैंक भर्ती परीक्षाओं के उम्मीदवारों की फोटो और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की दोबारा जांच की थी। इसमें सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों ने परीक्षा दी थी। फोटो और बायोमेट्रिक पहचान में अंतर मिलने पर संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान की गई।
आरोपियों ने बैंक भर्ती प्रक्रिया के कई चरणों में उम्मीदवार बनकर परीक्षा और इंटरव्यू दिए। पांच साल पुराने रिकॉर्ड से कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा इस जांच की खासियत है कि सिर्फ परीक्षा के समय पहचान जांचने के बजाय, पांच साल के पुराने रिकॉर्ड खंगालकर फर्जीवाड़े और नौकरी कर रहे उम्मीदवारों के बीच संबंध जोड़े गए।
2020 से 2024 तक की भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड दोबारा जांचे। इस बार परीक्षा के समय लिए उम्मीदवारों के आइरिस स्कैन (आंखों की पुतली की पहचान) का मिलान किया गया। जांच में कुछ स्कैन गिरफ्तार आरोपियों से मेल खाए, जबकि रिकॉर्ड में ये पहचान उन उम्मीदवारों की थी, जिन्हें बैंक में नौकरी मिली थी।
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
बैंक भर्ती में फर्जीवाड़े का मामला, जहाँ सीबीआई ने 5 साल पुरानी डेटा और आईरिस स्कैन का उपयोग कर 257 संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की है। यह विषय है बैंकिंग क्षेत्र में भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाना। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि कितने फर्जी अफसर पहले से ही बैंकिंग प्रणाली में काम कर रहे हैं, जिससे वित्तीय सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। आम जनता पर असर यह हो सकता है कि बैंकिंग सेवाओं पर भरोसा घटेगा, नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों को अनिश्चितता होगी, और
🎙️ जनता का संदेश का मत
बैंक भर्ती के फर्जीवाड़े से समाज की नींव पर असर पड़ा है, परंतु इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता ही सबसे बड़ा सम्पदा है। कानून के मार्ग पर चलकर, साक्ष्य आधारित जाँच और सख्त नियमों से हम भ्रष्टाचार को रोक सकते हैं। हमें अपने कार्यस्थलों और समाज में ईमानदारी की संस्कृति को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ साफ़-सुथरे रास्तों पर चल सकें।