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बालाघाट- मशरूम की खेती से हर माह 50 हजार रुपये तक कमा रहीं ज्योति

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 5 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
बालाघाट- मशरूम की खेती से हर माह 50 हजार रुपये तक कमा रहीं ज्योति

बालाघाट- महज दो वर्षों में उनका यह प्रयास एक सफल आजीविका गतिविधि के रूप में उभरा है और इससे उन्हें हर माह लगभग 50 हजार रुपये तक की आय हो रही है। अब ज्योति स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और आय का रास्ता दिखा रही हैं।

मुलना स्टेडियम बालाघाट में 4 से 6 नवंबर तक आयोजित दीपांजलि आजीविका संगम मेला-2026 में ज्योति जगने एवं उनके समूह की महिलाओं ने मशरूम उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई है। उनके स्टॉल पर ताजे मशरूम, सूखे मशरूम और मशरूम पाउडर के साथ मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया प्रदर्शित की गई है। मेले में पहुंचे कलेक्टर आदित्य सिंह जब उनके स्टॉल पर पहुंचे तो ज्योति ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने काम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनका समूह पिछले दो वर्षों से मशरूम उत्पादन कर रहा है और इससे हर माह लगभग 50 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।

ज्योति की खासियत केवल मशरूम उत्पादन तक सीमित नहीं है। उन्हें मशरूम तैयार करने की प्रक्रिया के साथ उसमें मौजूद पोषक तत्वों की भी अच्छी जानकारी है। उन्होंने बताया कि मशरूम प्रोटीन और विटामिन-डी का अच्छा स्रोत है। सूखे मशरूम में विटामिन-डी की मात्रा बढ़ सकती है, क्योंकि धूप में सुखाने के दौरान मशरूम में विटामिन-डी का निर्माण होता है। इस तरह मशरूम उत्पादन के माध्यम से वे लोगों को पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने का काम भी कर रही हैं।

ज्योति का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें ऐसे कामों से जोड़ना जरूरी है, जिन्हें वे अपने गांव में रहकर ही कर सकें। इसी सोच के साथ वे अन्य ग्रामीण महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण भी देती हैं। उनका प्रयास है कि महिलाएं मशरूम उत्पादन के जरिए अपने परिवार के पोषण की जरूरत पूरी करने के साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकें।

दीपांजलि आजीविका संगम मेले में ज्योति और उनके समूह की प्रदर्शनी ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि स्थानीय संसाधनों, सही प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयास से गांव की महिलाएं भी स्वरोजगार के नए अवसर तैयार कर सकती हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।