बंगाल उपचुनाव में लेफ्ट के उम्मीदारों का ऐलान:BJP-TMC का घोषित करना बाकी, ममता के लड़ने पर सस्पेंस; 6 अक्टूबर को मतदान
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पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा। CPI(M) के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट ने शनिवार को अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। CPI ने नंदीग्राम से शांतिगोपाल गिरि और CPI(M) ने रेजीनगर से सईद असद अली को टिकट दिया है। इन सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार पहले ही मैदान में उतर चुके हैं।
सत्ताधारी BJP और विपक्षी TMC ने अब तक अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं। नंदीग्राम से ममता बनर्जी के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के खाली करने से हुई है। रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई।
कांग्रेस ने 11 सितंबर को उम्मीदवार घोषित किए कांग्रेस ने शुक्रवार को रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ और नंदीग्राम से मिलन प्रधान को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के बयान के मुताबिक, इन नामों को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंजूरी दी। TMC में तीन गुटों का असर इसलिए फंसा पेंच TMC अब राज्य में मुख्य विपक्षी ताकत है।
हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी तीन हिस्सों में बंट गई है। इनमें एक गुट ममता बनर्जी और दूसरा रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में है। TMC के 20 लोकसभा सांसद छोटे दल NCPI में शामिल हो चुके हैं। इन सांसदों ने BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन दिया है। उन्होंने अब तक उपचुनाव को लेकर कोई रुख साफ नहीं किया है।
ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी, दोनों गुटों ने उम्मीदवार उतारने पर विचार करने की बात कही है। इससे दोनों सीटों के मुकाबले में एक और पेच जुड़ गया है। 16 सितंबर नामांकन दाखिल करने की लास्ट डेट निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों को 16 सितंबर तक नामांकन पत्र दाखिल करने की अनुमति दी है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा।
वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी। -------------------------------
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में बाईं ओर के उम्मीदवारों का नाम घोषित हो चुका है, जबकि सत्ताधारी BJP और विपक्षी TMC ने अभी तक अपने टिकटों की घोषणा नहीं की है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव की अनिश्चितता को दर्शाता है और यह दिखाता है कि बाईं ओर के दलों ने अपनी रणनीति पहले ही तय कर ली है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि वे अपने वोट के विकल्पों पर फिर से विचार करें, खासकर उन लोगों के लिए जो अभी तक किसी दल के प्रति वफादार नहीं हैं। यह चुनावी माह