बारिश से कुम्हारों की बढ़ी चिंता, दीपावली पर दीये की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका
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मिट्टी के दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां सुखाने में हो रही परेशानी, मिट्टी की कमी और चाइनीज सामान से भी कारोबार प्रभावित
01 नवंबर, मुंगेर (मुंगेर, बिहार) : जिले में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश ने कुम्हारों की चिंता बढ़ा दी है। दीपावली में अब महज एक सप्ताह शेष है। ऐसे में बारिश के कारण मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और मिट्टी के खिलौने सुखाने में कुम्हारों को काफी परेशानी हो रही है। तैयार उत्पादों को भट्ठी में पकाना भी मुश्किल हो गया है। इससे दीपावली के दौरान बाजार में मांग के अनुरूप दीये और मूर्तियों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।
असरगंज प्रखंड के ममई गांव के कुम्हारों ने बताया कि दीपावली को लेकर दीये और मूर्तियां बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने उनकी तैयारियों पर पानी फेर दिया है। बारिश के कारण मिट्टी से बने उत्पाद ठीक से सूख नहीं पा रहे हैं। नतीजतन, उन्हें समय पर भट्ठी में पकाना मुश्किल हो रहा है। यदि समय रहते दीये और मूर्तियां तैयार नहीं हुईं, तो इसका सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ेगा और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मिट्टी की कमी से भी जूझ रहे कुम्हार
कुम्हारों ने बताया कि मिट्टी की उपलब्धता में कमी के कारण उन्हें पहले से ही दीये और मूर्तियां बनाने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा बाजार में चाइनीज दीये और सजावटी सामान की बढ़ती उपलब्धता से पारंपरिक मिट्टी के दीयों की मांग भी प्रभावित हो रही है। इन परिस्थितियों के कारण कुम्हारों का पारंपरिक व्यवसाय लगातार चुनौतियों से जूझ रहा है।
उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीये बनाना केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने और मिट्टी से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके बावजूद पारंपरिक कारीगरों को अपना व्यवसाय बचाए रखने के लिए कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्वदेशी दीये खरीदने की अपील
कुम्हारों ने जिलेवासियों से अपील की कि दीपावली पर चाइनीज सजावटी सामान के बजाय स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये और अन्य उत्पाद खरीदें। इससे न केवल भारतीय संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय कुम्हारों को आर्थिक सहयोग भी मिलेगा।
इसके साथ ही उन्होंने सरकार से कुम्हारों की समस्याओं पर ध्यान देने, मिट्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पारंपरिक मिट्टी के बर्तन एवं दीये बनाने के व्यवसाय को प्रोत्साहित करने की मांग की।