ई-बसों में 29 महीने में 35.72 करोड़ घाटा:₹17.84 करोड़ कमाए, ₹53.57 करोड़ खर्च, अतिरिक्त खर्च का वहन कर रही सरकार
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →वाराणसी में चल रही इलेक्ट्रिक बस सेवा 29 महीने से लगातार घाटे में है। बसों से ₹17.84 करोड़ की कमाई हुई, जबकि संचालन पर ₹53.57 करोड़ खर्च हुए। यानी कुल ₹35.72 करोड़ का घाटा हुआ। कुल खर्च के मुकाबले करीब 66.7% रकम की भरपाई कमाई से नहीं हो सकी। इस दौरान अप्रैल 2024 से अगस्त 2026 तक 68 लाख 22 हजार 264 यात्रियों ने ई-बसों से सफर कर चुके है।
वाराणसी में दिसंबर 2021 से ई- बसे चल रही है। वर्तमान में 51 ई- बसे ऑन रोड है। वहीं यात्रियों का कहना है कि ई-बस को सुविधाजनक और ऑटो से सस्ता हैं। ड्राइवर-कंडक्टर ने बताया कि कुछ रूटों पर सवारी कम मिलने के बावजूद तय समय के कारण बस चलानी पड़ती है। क्षेत्रीय प्रबंधक के मुताबिक एक किमी बस चलाने का खर्च करीब ₹60 है, जबकि यात्री से मिलने वाला किराया ₹20 से कम है।
यात्री बोले-ऑटो से किराया कम, समय भी बचता है ई-बस से रोज सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि इसमें सुविधा ज्यादा है और ऑटो की तुलना में किराया कम लगता है। यात्री सुनीता वर्मा ने बताया कि वह रोज बस से आना-जाना करती हैं। उनके मुताबिक बस का किराया कम है, जबकि ऑटो से आने-जाने में ज्यादा पैसा खर्च होता है।
68.22 लाख यात्रियों ने किया सफर आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2024 से अगस्त 2026 के बीच 68,22,264 यात्रियों ने ई-बसों से सफर किया। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच 27,03,290 यात्री, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 27,44,387 यात्री और अप्रैल से अगस्त 2026 के पांच महीनों में 13,74,587 यात्री दर्ज हुए।
यानी यात्रियों की संख्या लगातार बनी रही, लेकिन बसों से हुई कमाई संचालन खर्च के मुकाबले काफी कम रही। 29 महीने में ₹17.84 करोड़ की कमाई के मुकाबले ₹53.57 करोड़ खर्च हुए। कंडक्टर बोले-रोज करीब 250 टिकट काटते हैं बस कंडक्टर सोनू पटेल ने बताया कि एक दिन में करीब 250 यात्रियों के टिकट काटे जाते हैं।
उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में यात्री मिल जाते हैं, लेकिन रविवार या त्योहार के दिन सवारी कम हो जाती है। लंका रूट पर ज्यादा सवारी, बाबतपूर पर कम कंडक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि लंका रूट पर ज्यादा सवारी मिलती है। बाबतपूर रूट क सबसे कम सवारी मिलती है। उन्होंने बताया कि बाबतपुर रूट पर सबसे कम सवारी मिलती है और वहां बसें कई बार खाली चलती हैं।
उन्होंने कहा कि कई स्टॉप जगह ऐसे भी है जहां बस खड़ी करने की जगह नहीं है। ऐसे में कई बार एक जगह पर तीन बसें खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में आगे वाली बस में एक भी यात्री होता है तो उसे आगे जाना पड़ता है। कभी बस खराब, कभी चार्जिंग खत्म; मिर्जामुराद जाना पड़ता है बस ड्राइवर राजेश कुमार यादव ने बताया कि कभी-कभी चलते समय बस में खराबी आ जाती है या चार्जिंग खत्म हो जाती है।
हालांकि, उनके मुताबिक ऐसा कभी-कभी ही होता है। उन्होंने बताया कि बस की चार्जिंग के लिए मिर्जामुराद जाना पड़ता है। एक बस दिनभर में करीब चार चक्कर लगाती है। 2024-25 में ₹14.96 करोड़ घाटा अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक ई-बसों से करीब ₹7.53 करोड़ की कमाई हुई, जबकि खर्च करीब ₹22.50 करोड़ रहा।
इस अवधि में ₹14.96 करोड़ का घाटा दर्ज हुआ। इस दौरान दिसंबर 2024 में यात्रियों की संख्या 2,90,558 तक पहुंची। इसके बावजूद महीने का घाटा करीब ₹1.42 करोड़ रहा। फरवरी 2025 में इस अवधि का सबसे कम घाटा ₹99.69 लाख रहा। 2025-26 में भी ₹14.25 करोड़ का घाटा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 27,44,387 यात्रियों ने सफर किया।
इस दौरान करीब ₹6.99 करोड़ की कमाई हुई, जबकि खर्च करीब ₹21.24 करोड़ रहा। यानी इस अवधि में ₹14.25 करोड़ का घाटा हुआ। इस साल जून 2025 में घाटा करीब ₹1.10 करोड़ रहा। जुलाई में यह बढ़कर करीब ₹1.29 करोड़ और दिसंबर में करीब ₹1.03 करोड़ रहा। अप्रैल-अगस्त 2026 में 6.51 करोड़ का घाटा अप्रैल से अगस्त 2026 के पांच महीनों में ई-बसों ने ₹3 करोड़ 32.03 लाख की कमाई की, जबकि खर्च ₹9 करोड़ 82.80 लाख रहा।
इस दौरान 13,74,587 यात्रियों ने सफर किया और बसों ने कुल 14,22,079 किमी की दूरी तय की। पांच महीने में कुल ₹6 करोड़ 50.77 लाख का घाटा हुआ। अगस्त में रूटवार भी लाखों का घाटा अगस्त 2026 की रूटवार रिपोर्ट में मिर्जामुराद-कैंट-राजघाट-DDU रूट पर सबसे ज्यादा घाटा दर्ज हुआ। इस रूट पर 11 बसें संचालित हुईं।
बसों ने 82,632 किमी की दूरी तय की और 74,149 यात्रियों ने सफर किया। रूट से ₹18.18 लाख की कमाई दर्ज हुई, जबकि रूटवार रिपोर्ट में ₹42.65 लाख का घाटा दर्ज है। कैंट-लंका पर 73 हजार यात्री, ₹28.52 लाख घाटा मिर्जामुराद-कैंट-लंका रूट पर अगस्त में 9 बसें चलीं। इस रूट पर 73,025 यात्रियों ने सफर किया।
बसों ने 56,008 किमी की दूरी तय की और ₹12.71 लाख की कमाई दर्ज हुई। रूटवार रिपोर्ट में घाटा ₹28.52 लाख है। सारनाथ-लंका पर 53 हजार यात्री, ₹24.81 लाख घाटा मिर्जामुराद-कैंट-सारनाथ-लंका रूट पर अगस्त में 8 बसें चलीं। यहां 53,296 यात्रियों ने सफर किया। बसों ने 47,519 किमी की दूरी तय की और ₹10.17 लाख की कमाई हुई।
रूटवार रिपोर्ट में घाटा ₹24.81 लाख दर्ज है। ₹60 प्रति किमी खर्च, किराया ₹20 से भी कम ई-बसों के घाटे की वजह को लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक परशुराम पाण्डेय ने बताया कि बसें कॉन्ट्रैक्ट पर संचालित होती हैं। बसों का संचालन निजी कंपनियों के साथ किए गए कॉन्ट्रैक्ट के तहत होता है। घाटे के बीच 250 नई ई-बसों की तैयारी मौजूदा ई-बसों के संचालन में ₹35.72 करोड़ के घाटे के बीच वाराणसी में 250 नई इलेक्ट्रिक बसों के लिए 15 रूट प्रस्तावित किए गए हैं।
इनमें बाबतपुर-कैंट, सारनाथ-कैंट, कैंट-DDU रेलवे स्टेशन, कैंट-लंका और कैंट-BLW-लंका-रामनगर जैसे रूट शामिल हैं। इन प्रस्तावित रूटों की लंबाई 5 से 23 किमी तक है। 2021 से चल रही है ई- बसें उत्तर प्रदेश सरकार की योजना के तहत 11 दिसंबर 2021 को तत्कालीन नगर विकास मंत्री ने वाराणसी में पहली बार इन ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
शुरुआत में इसे 25 बसों के साथ चुनिंदा रूट्स पर शुरू किया गया था वर्तमान में 51 ई- बसे चल रही है।
📡 स्रोत: NewsData.io