बाय-बाय, पापा कहकर चिनाब नदी में छलांग लगाई...:बेटी ने फोन पर कहा- दिल कह रहा है कि मुझे इसी रास्ते जाना चाहिए, जम्मू की घटना
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक लड़की ने चिनाब नदी में छलांग लगा दी। घटना शनिवार दोपहर करीब 2 बजे प्रेम नगर के पास शिवा दल पुल पर हुई। नदी में कूदने के बाद से उसका कोई पता नहीं चल सका है। पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और स्थानीय लोग नदी में उसकी तलाश कर रहे हैं। लड़की के पिता ने पुलिस को बताया कि बेटी ने सुसाइड करने से पहले किसी व्यक्ति के फोन से उनसे बात की थी।
उन्होंने उससे कई बार पूछा कि उसे क्या दिक्कत है। क्या उसे किसी ने परेशान किया है, तो बेटी ने सिर्फ इतना ही कहा- नहीं पापा, यह मेरी अपनी जिंदगी है। मेरा दिल कह रहा है कि मुझे इसी रास्ते जाना चाहिए। इसके बाद उसने 'बाय-बाय पापा' कहा और नदी में छलांग लगा दी। एक व्यक्ति के मोबाइल के किया पिता को फोन मृतका की पहचान 21 साल की पायल देवी के रूप में हुई है।
परिवार के मुताबिक शनिवार को पायल गांव में लगे एक स्थानीय मेले में गई थी। बाद में उसने अपने पिता कृष्ण लाल को फोन कर तबीयत खराब होने और डॉक्टर के पास जाने की बात कही। डॉक्टर के न मिलने पर वह किसी व्यक्ति के साथ बाइक से वापस लौट रही थी। इसके कुछ ही देर बाद ही उस व्यक्ति ने लड़की के पिता को फोन पर जानकारी दी कि आपकी बेटी बात करना चाहती है।
अचानक चिनाब नदी की ओर भागी है। पिता ने तुरंत बेटी से फोन पर बात की और बेटी ने उन्हें बाय-बाय कर नदी में छलांग लगा दी। ------------------- ये खबर भी पढ़ें… पिता की आंखों के सामने गंगा नदी में कूदी बेटी:मोबाइल को लेकर डांटने पर घर से निकली थी मिर्जापुर के कछवा में गुरुवार को एक पिता की आंखों के सामने उसकी 19 वर्षीय बेटी ने गंगा नदी में छलांग लगा दी।
रामापुर गांव की रहने वाली सपना सरोज को उसके पिता जयप्रकाश ने मोबाइल चलाने को लेकर डांटा था। पूरी खबर पढ़ें…
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक लड़की के चिनाब नदी में कूदने के बाद उसकी गुमशुदगी के बारे में है। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई क्योंकि लड़की ने फोन पर अपने पिता को ‘बाय-बाय, पापा’ कहकर अपनी आत्महत्या की बात की। ऐसी रिपोर्टें मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज की जागरूकता बढ़ाती हैं और आत्महत्या रोकथाम के कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल देती हैं। यदि इस तरह की घटनाएँ बढ़ती हैं तो युवा वर्ग में मानसिक तनाव और आत्म-हानि की चिंताएँ बढ़ सकती हैं, जिससे परिवारों और स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य श