BDO का भ्रष्टतंत्र–पत्नी को सांसद बनाने को रिश्वत का नेटवर्क:पैसा देकर पार्टी जॉइन कराई, 12 साल में करोड़ों वसूले, जानिए BDO का प्लान-B
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बिहार के एक BDO की कहानी सिर्फ भ्रष्टाचार की नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी से सियासत तक पहुंचने के प्लान की भी है। आरोपों के घेरे में आए BDO आनंद कुमार विभूति 2024 में पत्नी रितू आनंद के लिए लोकसभा टिकट की तलाश में थे। दावा है कि BJP, JDU और VIP के बड़े नेताओं से संपर्क साधा गया। अगर VIP उस वक्त NDA में होती और उसे मोतिहारी सीट मिलती तो रितू आनंद उम्मीदवार हो सकती थी।
पत्नी को सांसद बनाने के लिए ही विभूत सरकारी योजनाओं में लूट-खसोट मचाए था। 8 सितंबर को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की 5 ठिकानों पर एक साथ हुई छापेमारी ने जिस संपत्ति का खुलासा किया, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। आखिर BDO आनंद कुमार विभूति का पूरा प्लान क्या था, वह कैसे पैसा कमाते थे, पढ़िए संडे बिग स्टोरी में...।
जाति की राजनीति को बना रहे थे हथियार आनंद कुमार विभूति मलाह जाति से आते हैं। सरकारी नौकरी करते हुए उन्होंने जाति की राजनीति को अपना हथियार बनाया। पत्नी को आगे बढ़ाया। रुपए के दम पर राजनीति रसूख को मजबूत बनाने की कोशिश की। इनके अब तक के सर्विस पीरियड को देखा जाए तो पोस्टिंग भी पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिले में ही रही।
इन इलाकों में इनकी जाति की संख्या भी अच्छी खासी है। इन्हें लगने लगा था कि लोकसभा चुनाव में पत्नी उम्मीदवार बनती है तो अपनी जाति के अलावे दूसरे जाति के वोटर्स के वोट भी मिल जाएंगे। 5 लाख देकर भाजपा में दिलवाया पद काफी कोशिश करने के बाद भी लोकसभा चुनाव में BDO को पत्नी के लिए टिकट किसी पार्टी से नहीं मिला।
चुनाव बीत चुका था। तब इनकी एक और इच्छा सामने आई। वो थी पत्नी को बड़े राजनीतिक दल में जॉइन कराने और उसमें एक पद दिलाने की। भाजपा के एक नेता ने बताया, ‘आनंद कुमार विभूति की बात पार्टी में प्रदेश स्तर के एक बड़े नेता से हुई। उनके माध्यम से ही रितू आनंद को जनवरी 2025 में भाजपा जॉइन कराया गया।
फिर चंद दिनों के अंदर उन्हें मुजफ्फरपुर पूर्वी का जिला मंत्री बना दिया गया। इसके लिए नेता जी ने BDO से करीब 5 लाख रुपए लिए थे। पत्नी को MLC बनाना BDO का प्लान-B था लोकसभा चुनाव में तो BDO साहब की राजनीतिक दाल नहीं गली। इस कारण उन्होंने पत्नी को आगे बढ़ाने के लिए अपना प्लान B भी तैयार कर रखा था।
उन्हें अब बिहार विधान परिषद का सदस्य यानि MLC बनाना चाहते हैं। इसके लिए भी इनकी कोशिशें जारी थीं। तिरहुत और मिथलांचल को अपना चुनाव क्षेत्र भी चुन रखा था। सूत्रों की मानें तो NDA के अंदर भाजपा या किसी भी सहयोगी पार्टी से अपना काम बनाने में आनंद कुमार विभूति लगे थे। फिलहाल इनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा पर कानूनी शिकंजा कस EOU ने पानी फेर दिया है।
अपने 8%, पूर्व मंत्री को देते थे 5% कमीशन दरभंगा के बहादुरपुर ब्लॉक में करीब दो महीने पहले ही BDO आनंद कुमार विभूति का ट्रांसफर हुआ था। इसके पहले उनकी पोस्टिंग मुजफ्फरपुर के कांटी ब्लॉक में थी। कांटी के स्थानीय सूत्र के मुताबिक, सरकारी योजनाओं में काम कराने को लेकर इनका 15% कमीशन फिक्स था।
इसके 3 हिस्से होते थे। दलाल से इशारा मिलने पर ही आगे बढ़ाते थे काम कांटी ब्लॉक में नौकरी करने के दौरान BDO की काली कमाई में सरकारी कर्मचारी की जगह प्राइवेट दलाल बेहद खास बना हुआ था। जो उसी इलाका का रहने वाला था। जब ब्लॉक में किसी सरकारी योजना से जुड़े काम को लेकर कोई पहुंचता था तो उसे आनंद कुमार विभूति अपने प्राइवेट दलाल के पास भेज दिया करते थे।
फिर उनका प्राइवेट दलाल सब कुछ तय करता था। कमीशन की बात भी वही फिक्स करता था। बात बनने के बाद जब इसका इशारा BDO को मिलता था तभी काम आगे बढ़ता था। नौकरी में आने के टाइम खपरैल घर था आनंद कुमार विभूति मूल रूप से पूर्वी चंपारण के चिरैया थाना के लालबेगिया इलाके के रहने वाले हैं। BPSC की 53वीं से 55वीं बैच की परीक्षा एक साथ हुई थी।
इसे पास कर 2014 में आनंद ग्रामीण विकास सेवा के तहत प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) बने। सरकारी नौकरी जॉइन करने तक इनकी और परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। उस वक्त तक इनका पुश्तैनी घर पूरी तरह से खपरैल था। पत्नी रितू आनंद भी हाउस वाइफ ही रही हैं। कांटी में रहते वक्त ही हुई थी शिकायत काली कमाई का खेल मुजफ्फरपुर के कांटी ब्लॉक में किस तरह से BDO साहब खेल रहे थे, उससे वहां के कई लोग वाकिफ थे।
सरकारी योजनाओं के तहत जो भी काम पूरा होने का दावा किया जा रहा था, उसका कोई बोर्ड संबंधित इलाके में लगता ही नहीं था। जबकि, किस योजना के तहत, कौन सा काम हो रहा है?
उस पर कितना खर्च हो रहा है?
इसकी पूरी जानकारी एक बोर्ड पर लिखकर लगाना होता है। लेकिन, कमीशन के खेल की वजह से ऐसा हो नहीं रहा था। इन 5 ठिकानों पर EOU ने की थी छापेमारी संभावना से अधिक मिली संपत्ति EOU ने जब आंनद के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया तो उसमें इनके पास मौजूद करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्ति की डिटेल्स भी थी।
जिसमें कुल 9 प्रॉपर्टी खरीदने और खर्चों का जिक्र था। मगर, जब छापेमारी हुई तो उससे कहीं अधिक प्रॉपर्टी के होने के सबूत हाथ लगे। जो पटना, मुजफ्फरपुर और मेातिहारी में खरीदे गए हैं। छापेमारी में EOU के हाथ कुल 16 प्रॉपर्टी के पेपर लगे। इसमें 9 प्रॉपर्टी आनंद कुमार विभूति ने अपने नाम पर खरीदी है।
जबकि, 7 प्रॉपर्टी पत्नी के नाम पर खरीद रखी है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जितनी भी प्रॉपर्टी खरीदी गई है, उसमें सरकारी रेट से भी कम रुपए पेपर पर दिखाए गए हैं। इससे इस बात की संभावना अधिक बन गई है कि प्रॉपर्टी खरीदने में काली कमाई के कैश में रुपए दिए गए हैं। पति-पत्नी के नाम से कुल 16 बैंक अकाउंट्स के डिटेल मिले।
जिसे जांच एजेंसी ने फिलहाल फ्रिज करवा रखा है। वहीं, एक बैंक लॉकर का पता चला। जिसे कोर्ट से आदेश मिलने के बाद खोला जाएगा। केस में खर्च की डिटेल्स पूछताछ के लिए बुलाएगी EOU EOU की एक टीम आनंद कुमार विभूति की पूरी कुंडली खंगाल रही है। छापेमारी में मिले प्रॉपर्टी के डिटेल्स के आधार पर उसका बाजार भाव पता कर रही है।
अब तक की सरकारी नौकरी करते हुए सैलरी के रूप में 99 लाख रुपए मिला है। 42 लाख रुपए का लोन लिया था। 10 लाख रुपया दूसरे जरिए से इन्होंने कमाए थे।
📡 स्रोत: NewsData.io