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बेंगलुरु में शादी का प्रपोजल ठुकराने पर लड़की पर हमला:बीच सड़क पर चाकू मारा, घटना CCTV में रिकॉर्ड, दोनों आरोपी गिरफ्तार

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026 👁️ 11 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
बेंगलुरु में शादी का प्रपोजल ठुकराने पर लड़की पर हमला:बीच सड़क पर चाकू मारा, घटना CCTV में रिकॉर्ड, दोनों आरोपी गिरफ्तार

बेंगलुरु में 13 जुलाई को 22 साल की लॉ स्टूडेंट अमृता पर चाकू से हमला किया गया। इसका CCTV फुटेज अब सामने आया है। चौथे वर्ष की छात्रा अमृता ने शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। पुलिस के मुताबिक, इसी के बाद उस पर हमला किया गया। वारदात एचएएल रोड के कोडिहल्ली इलाके में शाम करीब 4:30 बजे हुई।

अमृता ने 15 जुलाई की शाम अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामले में धनुष G और उसके छोटे भाई सूर्य G को गिरफ्तार किया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। हमले में सीने और पीठ पर चाकू मारा पुलिस के मुताबिक, अमृता, धनुष G और सूर्य G एक ही इलाके में रहते थे। दोनों परिवार धार्मिक आयोजनों के जरिए एक-दूसरे को जानते थे।

अमृता और धनुष की पहले दोस्ती हुई। बाद में यह दोस्ती रिश्ते में बदल गई। पुलिस ने बताया कि अमृता को धनुष के अतीत के बारे में पता चला। धनुष पहले शादीशुदा था, उसका तलाक हो चुका था और उसका एक बच्चा भी है। इसके बाद अमृता ने रिश्ता खत्म कर दिया और धनुष से दूरी बना ली। पुलिस के मुताबिक, उसके इस फैसले से सूर्य नाराज था।

सूर्य ने कथित तौर पर अमृता को धमकी दी थी। उसने कहा था कि वह अपने भाई को ठुकराने के लिए उसे नहीं छोड़ेगा। 13 जुलाई को दोनों के बीच कहासुनी हुई। इसी दौरान सूर्य ने कथित तौर पर चाकू से अमृता पर हमला कर दिया। उसने अमृता के सीने और पीठ पर चाकू मारा। इसके बाद वह मौके से भाग गया। स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया।

अमृता के परिवार वाले उसे अस्पताल ले गए। 48 घंटे से ज्यादा इलाज के बाद मौत अमृता 48 घंटे से ज्यादा समय तक अस्पताल में भर्ती रहीं। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन 15 जुलाई की शाम उनकी मौत हो गई। घटना के बाद जीवन भीमा नगर पुलिस ने धनुष और सूर्य के खिलाफ केस दर्ज किया। दोनों गिरफ्तार हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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🎙️ जनता का संदेश का मत

अमृता की कहानी हमें यह सिखाती है कि अस्वीकृति पर भी सहानुभूति और शांति का मार्ग अपनाना चाहिए। जब भावनाएँ उफनें, तो संवाद और कानूनी सहायता से समाधान ढूँढ़ें। समाज में सहिष्णुता और सम्मान का माहौल बनाकर हम हिंसा को रोक सकते हैं। हर व्यक्ति को अपनी भावनाओं को नियंत्रित करके दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए, ताकि ऐसे दुखद घटनाएँ न हों।

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