बेतिया-अंचल कार्यालय में 10 हजार रुपये लेते VIDEO:बड़ा बाबू पर रिश्वत लेने का दावा, जमीन से जुड़े काम के बदले रकम लेने का आरोप
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बेतिया के मझौलिया अंचल कार्यालय से जुड़ा एक वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति अंचल कार्यालय के अंदर एक अधिकारी को कथित तौर पर 10 हजार रुपये देते नजर आ रहा है। रकम देने के बाद वह व्यक्ति यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि अब उसका काम हो जाएगा। वीडियो सामने आने के बाद अंचल कार्यालय में कथित रिश्वतखोरी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वीडियो में रुपये लेते दिख रहा व्यक्ति कौन?
वायरल वीडियो में रुपये लेते दिख रहे व्यक्ति की पहचान मझौलिया अंचल कार्यालय के बड़ा बाबू रवि रंजन कुमार श्रीवास्तव के रूप में बताई जा रही है। हालांकि, दैनिक भास्कर डिजिटल वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। जमीन के काम के बदले पैसे लेने का दावा वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि जमीन से जुड़े किसी काम को कराने के एवज में 10 हजार रुपये लिए गए।
हालांकि, रकम किस काम के लिए दी गई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। वीडियो में भी लेन-देन का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं है। पैसे देने के बाद बोला- अब काम हो जाएगा वीडियो में कथित तौर पर रुपये देने वाला व्यक्ति पैसे सौंपने के बाद यह कहता सुनाई दे रहा है कि अब उसका काम हो जाएगा। इसी हिस्से को लेकर सोशल मीडिया पर रिश्वत लेने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, वीडियो की तारीख, स्थान और पूरी घटना का संदर्भ अभी स्पष्ट नहीं है। वायरल वीडियो की जांच की मांग वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि वीडियो की जांच में सरकारी काम के बदले पैसे लेने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने प्रशासन से वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराने, वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान स्पष्ट करने और लेन-देन के पीछे की वास्तविक वजह सामने लाने की मांग की है। फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ जनता का संदेश का मत
रिश्वत के इस कृत्य से न केवल सार्वजनिक संसाधन क्षतिग्रस्त होते हैं, बल्कि समाज में विश्वास भी टूटता है। हमें पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि हर नागरिक को न्यायसंगत सेवा मिले। जब भी किसी को अनुचित लाभ की आशा हो, तो उसे कानूनी रास्ते अपनाने की प्रेरणा दें, न कि अवैध तरीकों से। इस तरह हम एक सशक्त, नैतिक समाज का निर्माण कर सकते हैं, जहाँ हर निर्णय ईमानदारी पर आधारित हो।