भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 1,575 मेगावाट पहुंची
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अक्टूबर 14, नई दिल्ली: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इन केंद्रों के लिए बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना अहम है।
सरकार के मुताबिक, देश में डेटा सेंटर की स्थापित क्षमता 2020 में करीब 375 मेगावाट थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर लगभग 1,575 मेगावाट हो गई।
मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और जामनगर देश में डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं।
डेटा सेंटर में बड़ी मात्रा में डेटा को स्टोर और प्रोसेस किया जाता है। AI, ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड स्टोरेज और दूसरी डिजिटल सेवाओं के संचालन में इनकी अहम भूमिका है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत बढ़ रही है। इससे इन केंद्रों की बिजली की मांग भी बढ़ रही है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव मयंक तिवारी के मुताबिक, भारत में नवीकरणीय और हरित ऊर्जा की क्षमता तेजी से बढ़ी है। इससे डेटा सेंटर जैसे बड़े बिजली उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी करने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
सरकार का जोर नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती क्षमता और मजबूत बिजली बुनियादी ढांचे के जरिए डेटा सेंटर की बढ़ती मांग को पूरा करने पर है।
(बाइट- जितिन प्रसाद, केंद्रीय मंत्री )
(बाइट- मयंक तिवारी, सचिव, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय )