भारत-जापान साझेदारी तकनीक और सतत विकास के नए युग की आधारशिला बनेगी: राजेश धर्माणी
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प्रतिनिधि मंडल ने होक्काइडो यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लिया भाग
अगस्त 09, बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश): तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी का दौरा किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के साथ शैक्षणिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान तथा विद्यार्थियों के लिए एक्सपोजर कार्यक्रमों की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।प्रतिनिधिमंडल ने साप्पोरो स्थित होक्काइडो यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस टेक्नॉलॉजी फाॅर सस्टेनेबल फूड, हेल्थ एंड मैटेरियल्स (आईसीएटीएस एंड एफएचएम-2026) में भी भाग लिया।
सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच उन्नत प्रौद्योगिकी, सतत कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, उन्नत सामग्री, अनुसंधान तथा कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक एवं पारिस्थितिक विशिष्टताओं के कारण सतत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार प्रदेश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
कृषि एवं बागवानी, जल संसाधन, वन संपदा तथा हिमालयी पारिस्थितिकी से जुड़े क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक एवं अनुसंधान का उपयोग कर टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं तकनीकी संपर्कों से हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा, आधुनिक तकनीकों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
साथ ही, इससे प्रदेश में तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ करने तथा विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास के नए अवसर सृजित करने में भी मदद मिलेगी। राजेश धर्माणी ने हिमाचल प्रदेश और होक्काइडो के बीच समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों क्षेत्र पर्वतीय भूगोल, ठंडी जलवायु, प्राकृतिक सुंदरता, कृषि और प्रकृति के साथ गहरे संबंध के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह समानता दोनों क्षेत्रों के बीच अनुभवों और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान के नए अवसर प्रदान कर सकती है। उन्होंने युवा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भारत-जापान सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, फैकल्टी सहयोग तथा विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
धर्माणी ने होक्काइडो विश्वविद्यालय के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार की दीर्घकालीन शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि (आईसीएटीएस एंड एफएचएम-2026) सम्मेलन भारत और जापान के बीच नई साझेदारियों, संयुक्त शोध परियोजनाओं और दीर्घकालीन सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-जापान सहयोग को और मजबूत करने से तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास को नई गति मिलेगी तथा इसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर भारत और जापान के बीच तकनीक व सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग पर आधारित है, जहाँ हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी का दौरा किया। यह विषय भारत-जापान साझेदारी के नए युग की शुरुआत का संकेत देता है, जिसमें शैक्षणिक, अनुसंधान और ज्ञान विनिमय पर जोर दिया गया है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच तकनीकी और शैक्षणिक संबंध मजबूत होंगे, और भारत की नवाचार क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। आम जनता के लिए इसका असर रोजगार के नए अवसर, उन्नत शिक्षा और सतत विकास के