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भारत को पूरा सपोर्ट, जिनपिंग के आने से पहले बोला चीन

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 9 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
भारत को पूरा सपोर्ट, जिनपिंग के आने से पहले बोला चीन

12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस महासम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की संभावनाएं हैं। उनके भारत आगमन से ठीक पहले ही बीजिंग से एक बड़ा कूटनीतिक बयान सामने आया है। जिसमें चीन ने भारत के अध्यक्षता का खुलकर समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ शब्दों में कहा कि चीन ब्रिक्स सहयोग को बहुत अधिक महत्व देता है और वह भारत की मेजबानी में होने वाले इस शिखर सम्मेलन का पूरी तरीके से समर्थन करता है।

अगर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली के भारत मंडप में आयोजित हो रहे सम्मेलन में शिरकत करते हैं तो यह साल 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। सीमा विवाद और पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच बने हुए तनाव के बाद जिनपिंग अगर भारत आते हैं तो उससे पहले चीन की ओर से यह सकारात्मक रुख देखने को मिल रहा है।

इसे भी पढ़ें: UN में भारत को वीटो दो, ब्रिक्स से पहले बोला यूरोपीय संघ जहां पर द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी यह अहम बयान है। हालांकि जब चीनी प्रवक्ता से यह सवाल पूछा गया कि चीन की तरफ से इस सम्मेलन में कौन शामिल होगा?

तो उन्होंने कहा कि फिलहाल साझा करने के लिए कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। लेकिन भारत की अध्यक्षता और ब्रिक्स एजेंडे को चीन का पूरा समर्थन हासिल है। भारत इस बार 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। जो कि बिल्डिंग ऑफ रेजिलियंस इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी के थीम के तहत किया जा रहा है।

प्रगति मैदान स्थित भारत मंडप में जुटने वाले विश्व नेताओं के बीच कई सारे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। जिसमें मुख्य तौर पर इन मुद्दों पर विशेष ध्यान रखा जाएगा और वह मुद्दे हैं मजबूत ग्लोबल सप्लाई चेन। इसे भी पढ़ें: ब्रिक्स 2026: भारत की कूटनीतिक क्षमताओं को चुनौती देता वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों से निपटने पर दूसरी बड़ी चर्चा होगी लोकल करेंसी में व्यापार के मुद्दे पर।

क्रॉस बॉर्डर पेमेंट इंटीग्रेशन और राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर बात होगी। रूस की ओर से बयान भी सामने आ गया जिसमें उन्होंने बताया कि रूस की तरफ से 90% जो ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार होता है उसमें वह लोकल करेंसी में ही यानी राष्ट्रीय करेंसी में ही व्यापार कर रही है।

तीसरी बड़ी चर्चा होगी टेक्नोलॉजी और एआई को लेकर डिजिटल ट्रेंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर सभी नेता मिलकर बात करेंगे। संस्थाओं में सुधार चौथा मुद्दा हो सकता है। जहां पर न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार और वैश्विक वित्त एवं राजनीतिक संस्थाओं में जरूरी सुधार पर चर्चा की जाएगी।

यानी कि कुल मिलाकर नई दिल्ली में जो सभा आयोजित होगी वहां पर सभी नेता मिलकर कई सारे मुद्दों पर चर्चा करेंगे जिसका साझा लक्ष्य होगा सभी ब्रिक्स देशों की उन्नति। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन अपने आप में खास है क्योंकि इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है।

इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के सिरेला रामाफोसा, मिस्र के अबदे फतेह अलसीसी, इंडोनेशिया के प्रोबो सुबियानतो, ईरान के मशहूद पेजियान समेत 11 सदस्य देश और 10 पार्टनर देशों के शीर्ष नेता इसमें शामिल होंगे और अटकलें लगाई जा रही हैं कि खुद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इसमें शिरकत कर सकते हैं।

हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अटकलें लगाई जा रही। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें मौजूद होंगे और इस बड़े इवेंट से ठीक पहले चीन की तरफ से खुला समर्थन मिलना बताता है कि भारत के बढ़ते हुए कद को पूरी दुनिया मान रही है और समझ भी रही है।

यह सम्मेलन ब्रिक्स के 20 साल पूरा होने का प्रतीक भी है। जहां पर भारत विस्तारित bricks प्लस के जरिए ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को दुनिया के मंच पर मजबूती से रखेगा। भारत ने इससे पहले साल 2012, साल 2016 और साल 2021 में ब्रिक्स की सफल अध्यक्षता की है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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